सिद्धार्थनगर। जिले के ओडीओपी में शामिल कालानमक के भंडारण में अब परेशानी नहीं होगी। नौगढ़ तहसील के बर्डपुर नंबर सात में काला नमक धान भंडारण के लिए वेयर हाउस (गोदाम) निर्माण होगा।
जिलाधिकारी डॉ. राजागणपति आर ने तहसीलदार नौगढ़ को बर्डपुर नंबर सात में पांच बीघा से बंजर भूमि को राजस्व अभिलेखों में कृषि विभाग के नाम अंकित करने के निर्देश दिए हैं। यहां गोदाम बनने से काला नमक की खेती करने वाले किसानों को भंडारण और क्रय करने की सुविधा मिलेगी।
जिलाधिकारी ने नौगढ़ तहसील के ग्रामसभा बर्डपुर नंबर सात की बंजर भूमि को अपने अधिकार में ले लिया है। साथ ही तहसीलदार नौगढ़ को राजस्व अभिलेखों में इस भूमि को कृषि विभाग अंकित करने का निर्देश दिए हैं। कृषि विभाग को आवंटित इस भूमि पर वेयर हाउस का निर्माण कराया जाएगा। बर्डपुर क्षेत्र में काला नमक धान की खेती करने वाले किसानों की तादाद अधिक है।
यहां गोदाम बनने से क्षेत्र के किसानों को धान की फसल की बिक्री और भंडारण की सुविधा उपलब्ध होगी, जिससे किसानों को काला नमक धान की फसल का उचित मूल्य मिल सकेगा।
एक जनपद एक उत्पाद में चयनित होने के बाद कालानमक धान को बढ़ावा देने की पहल शुरू हो गई। काला नमक धान की खेती उसकी समस्या और बाजार को लेकर काला नमक बोर्ड का गठन किया गया है। इसमें जिला स्तर के अधिकारी के अलावा किसान और वैज्ञानिक व कारोबारी सदस्य बनाए गए हैं। इसमें किसानों बैठक में किसानों की समस्या को सुनने के साथ-साथ निस्तारण और बाजार में बिक्री करवाने का भी काम बोर्ड करेगा।
कृषक प्रशिक्षण और सहायता केंद्र का भी होगा निर्माण: जिले के लिए चयनित ओडीओपी काला नमक को बढ़ावा देने के लिए कृषक प्रशिक्षण और सहायता केंद्र का निर्माण होगा। राज्यसभा सदस्य बृजलाल ने अपनी सांसद निधि से 76.97 लाख रुपये आवंटित किए हैं। इसके निर्माण से जिले में काला नमक की खेती करने वाले किसानों को उचित मूल्य के साथ अपने उत्पादन की बिक्री करने का केंद्र मिल जाएगा।
शहर के अशोक मार्ग पर ओडीओपी काला नमक के लिए मार्ट का निर्माण किया जाएगा। बनने वाली दुकानों में काला नमक चावल की विभिन्न किस्मों की प्रदर्शनी लगाई जाएगी, जिससे किसान अपने उत्पादन की गुणवत्ता के आधार पर क्रय क्षमता बढ़ाने के लिए प्रदर्शनी लगा सकेंगे।
बढ़ा खेती का रकबा: जिले में वर्ष 2024 में काला नमक चावल की खेती लगभग 18,000 हेक्टेयर क्षेत्र में की गई थी जो 2018 में केवल 2,700 हेक्टेयर थी। इसके सापेक्ष कई गुना अधिक है। यह वृद्धि खेती को बढ़ावा देने वाले सरकारी प्रयासों का परिणाम है।