सिद्धार्थनगर। फर्जी दिव्यांगता प्रमाणपत्र जारी किए जाने के मामले में दिल्ली पुलिस की जांच का दायरा बढ़ता जा रहा है। सीएमओ कार्यालय से जुड़े वरिष्ठ मलेरिया निरीक्षक जयप्रकाश शुक्ल की गिरफ्तारी के बाद दिल्ली पुलिस ने दो कर्मचारियों को पूछताछ के लिए बुलाया।
दोनों 23 सितंबर को दिल्ली के मौरिस नगर थाने में पहुंचे, जहां उनसे अलग-अलग पूछताछ की गई और संबंधित अभिलेखों की जांच की गई। पूछताछ के बाद दोनों को वापस भेज दिया गया।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, एक कर्मचारी पर आरोपी बाबू की ओर से रुपये मंगवाने और दूसरे पर फर्जी प्रमाणपत्र तैयार कराने में सहयोग करने का आरोप है। पूछताछ के दौरान पुलिस ने लेनदेन और प्रमाणपत्र तैयार करने की प्रक्रिया से जुड़े तथ्यों की जानकारी ली। बताया जा रहा है कि पुलिस को पूछताछ में कुछ अहम जानकारियां मिली हैं।
अब डिजिटल साक्ष्यों और अभिलेखों की जांच के आधार पर अन्य लोगों से भी पूछताछ की जा सकती है। जिले के मलेरिया विभाग में तैनात वरिष्ठ मलेरिया निरीक्षक जयप्रकाश शुक्ल करीब 12 वर्षों से अचल प्रशिक्षण केंद्र में दिव्यांगता प्रमाणपत्र जारी करने वाले पटल पर सहायक के रूप में संबद्ध था।
आरोप है कि लंबे समय से इसी पटल पर काम करते हुए वह प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा था।
10 सितंबर को दिल्ली पुलिस की टीम सिद्धार्थनगर पहुंची थी। टीम ने एक कमरे में जयप्रकाश शुक्ल से कई घंटे पूछताछ की थी। इसके बाद उसे अपने साथ दिल्ली ले गई थी। दिल्ली पुलिस की जांच में तीन जिलों से जुड़े 16 दिव्यांगता प्रमाणपत्र फर्जी पाए जाने की बात सामने आई थी। इनमें चार प्रमाणपत्र सिद्धार्थनगर से जारी होने की जानकारी सामने आई थी।
जयप्रकाश से पूछताछ के बाद पुलिस की जांच ईएनटी विभाग में कान की जांच से जुड़े एक स्वास्थ्यकर्मी और शव वाहन से जुड़े एक कर्मचारी तक पहुंची। दोनों से अलग-अलग पूछताछ की गई। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने दोनों को मौरिस नगर थाने में पूछताछ के लिए बुलाया।
23 सितंबर को ईएनटी विभाग से जुड़े कर्मचारी ने संबंधित अभिलेखों के साथ पुलिस के सामने उपस्थित होकर जानकारी दी। वहीं, शव वाहन से जुड़े कर्मचारी से कथित लेनदेन के संबंध में पूछताछ की गई। पुलिस करीब दो लाख रुपये के ऑनलाइन लेनदेन की जानकारी की भी जांच कर रही है।