- सिद्धार्थ विश्वविद्यालय में तीन दिवसीय कार्यशाला के दूसरे दिन विशेषज्ञों ने बताईं वैज्ञानिक तकनीकें
- बटन और ऑयस्टर मशरूम उत्पादन के साथ अचार व स्टफ्ड मशरूम बनाने का दिया व्यावहारिक प्रशिक्षण
कपिलवस्तु। सिद्धार्थ विश्वविद्यालय में चल रही तीन दिवसीय मशरूम उत्पादन प्रशिक्षण कार्यशाला के दूसरे दिन शुक्रवार को प्रतिभागियों को मशरूम उत्पादन की वैज्ञानिक तकनीकों, वित्तीय प्रबंधन और खाद्य उत्पाद तैयार करने का प्रशिक्षण दिया गया। वनस्पति विज्ञान, कृषि, गृह विज्ञान विभाग और परामर्श एवं प्लेसमेंट सेल के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यशाला में विशेषज्ञों ने मशरूम उत्पादन को स्वरोजगार और उद्यमिता से जोड़ने की जानकारी दी।
वनस्पति विज्ञान विभाग के अध्यक्ष एवं कार्यशाला संयोजक डॉ. आशुतोष कुमार वर्मा ने बताया कि प्रशिक्षण का उद्देश्य शोधार्थियों और विद्यार्थियों को मशरूम उत्पादन की वैज्ञानिक तकनीकों, स्वरोजगार की संभावनाओं और मशरूम आधारित खाद्य उत्पादों के निर्माण से परिचित कराना है, ताकि वे रोजगार और उद्यमिता के नए अवसर विकसित कर सकें।
तकनीकी सत्र में वनस्पति विज्ञान विभाग की सहायक आचार्य डॉ. अंकिता श्रीवास्तव ने खाने योग्य और जहरीले मशरूम की पहचान, उपयुक्त प्रजातियों के चयन तथा स्टरलाइजेशन की प्रक्रिया समझाई। उन्होंने मशरूम की बाहरी संरचना और प्रमुख लक्षणों के आधार पर पहचान करने की जानकारी दी। साथ ही उत्पादन के दौरान स्वच्छता बनाए रखने, उपकरणों और उत्पादन स्थल को संक्रमणमुक्त रखने के तरीके बताए।
कृषि विभाग के डॉ. महेंद्र चौधरी ने मशरूम उत्पादन के लिए परियोजना रिपोर्ट तैयार करने और वित्तीय सहायता प्राप्त करने की प्रक्रिया समझाई। उन्होंने परियोजना की लागत, जरूरी संसाधन, संभावित आय और सरकारी योजनाओं के माध्यम से मिलने वाली सहायता की जानकारी दी। डॉ. अरविंद कुमार त्रिपाठी ने बैंक ऋण, स्वरोजगार योजनाओं और कृषि उद्यमिता से जुड़ी वित्तीय सुविधाओं के बारे में बताया।
व्यावहारिक सत्र में गृह विज्ञान विभाग की प्रभारी एवं कार्यशाला की सह-संयोजक डॉ. रक्षा ने मशरूम की कटाई के बाद उसके रखरखाव और पोस्ट हार्वेस्ट तकनीक की जानकारी दी। प्रतिभागियों को बटन और ऑयस्टर मशरूम के उत्पादन का प्रशिक्षण भी दिया गया। गृह विज्ञान विभाग की ओर से मशरूम के मूल्यवर्धित उत्पाद तैयार करने का प्रदर्शन किया गया। इसमें स्टफ्ड मशरूम और मशरूम का अचार बनाने की विधि बताई गई।
इस अवसर पर कार्यशाला की सचिव डॉ. किरन गुप्ता, डॉ. मनोज कुमार, डॉ. दीप्ति गिरी, डॉ. विनिता रावत, डॉ. हरि प्रकाश यादव सहित विभिन्न विभागों के शिक्षक और विद्यार्थी मौजूद रहे।