- बाढ़ के बाद बिगड़े हालात, हर व्यक्ति तक मदद पहुंचाने में जुटा बल
सिद्धार्थनगर/बढ़नी। नेपाल में भोटेकोशी और त्रिशूली नदी में आई प्रलयंकारी बाढ़ के बाद राहत और बचाव अभियान तेज कर दिया गया है। घर, सड़क और पुल बह जाने से प्रभावित हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। नेपाल सरकार, सेना, पुलिस और विभिन्न राहत एजेंसियां भोजन, दवा, पेयजल और अस्थायी आवास की व्यवस्था में जुटी हैं।
कई इलाकों में राहत शिविरों और अस्थायी ठिकानों की स्थिति अब भी चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। लोगों तक राहत पहुंचाने में सैन्य कर्मी और बचाव दल के लोग लगे हुए हैं। 30 अगस्त तक नेपाल में बचाव अभियान जारी रहने के साथ भोटेकोशी नदी का जलस्तर फिर बढ़ने की चेतावनी के बाद रसुवा, नुवाकोट और धादिंग नदी के किनारे क्षेत्रों में सतर्कता बढ़ा दी गई है।
नेपाल प्रशासन की ओर से मिल रही जानकारी के अनुसार बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों में सड़क और पुल टूटने के कारण कई गांवों का संपर्क कट गया है। ऐसे स्थानों से लोगों को हेलीकॉप्टर और अन्य उपलब्ध साधनों से सुरक्षित जगहों तक पहुंचाया जा रहा है। नेपाल सरकार के अनुसार राहत और बचाव कार्य में सभी उपलब्ध संसाधन लगाए गए हैं और लापता नेपाली और विदेशी नागरिकों की तलाश प्राथमिकता बनी हुई है। राहत शिविरों और अस्थायी ठिकानों में विस्थापित परिवारों को भोजन, पेयजल, प्राथमिक चिकित्सा, दवाइयां और अस्थायी रहने की सुविधा उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।
बाढ़ में घरों के साथ लोगों का जरूरी सामान और कई मरीजों की नियमित दवाइयां भी नष्ट हो गई हैं, जिससे चिकित्सा सहायता की जरूरत बढ़ गई है। प्रभावित इलाकों में राहत सामग्री पहुंचाने में सबसे बड़ी बाधा सड़क संपर्क टूटना है। कई स्थानों पर राहत सामग्री हेलीकॉप्टर के माध्यम से पहुंचाई जा रही है। अंतरराष्ट्रीय मानवीय संगठनों और विभिन्न देशों ने भोजन, चिकित्सा सहायता और आवश्यक राहत सामग्री भेजना शुरू कर दिया है। राहत एजेंसियों के सामने केवल लोगों को बचाना ही नहीं बल्कि विस्थापित परिवारों के लिए सुरक्षित आवास, स्वच्छ पेयजल और स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना भी बड़ी चुनौती है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को विशेष सहायता की जरूरत पड़ रही है।
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भारत से 68.5 टन राहत सामग्री पहुंची
नेपाल के इस कठिन समय में भारत ने भी राहत अभियान तेज किया है। 30 अगस्त तक भारत की ओर से नेपाल को 68.5 टन राहत सामग्री पहुंचाई जा चुकी है। इसमें आवश्यक दवाइयां, भोजन के पैकेट, पोर्टेबल जनरेटर, पानी शुद्ध करने की गोलियां और तकनीकी उपकरण शामिल हैं। भारत ने सुरंगों में फंसे लोगों को निकालने के लिए विशेषज्ञ टीम भी भेजी है। इसके अलावा क्षतिग्रस्त सड़क संपर्क बहाल करने के लिए मॉड्यूलर स्टील ब्रिज और बेली ब्रिज से संबंधित उपकरण भी नेपाल पहुंचाए जा रहे हैं।
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बढ़नी सिद्धार्थनगर भारत-नेपाल सीमा पर प्रशासन की नजर
नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ का असर सीमावर्ती भारतीय इलाकों पर भी देखा जा रहा है। भारत सरकार ने उत्तर प्रदेश और बिहार के नेपाल सीमा से जुड़े जिलों को सतर्क रहने को कहा है। संभावित आपदा की स्थिति से निपटने के लिए सीमा क्षेत्रों में आपदा राहत एजेंसियों को तैयार रखा गया है। भारत और नेपाल के बीच राहत सामग्री और तकनीकी सहायता पहुंचाने का सिलसिला जारी है। नेपाल में फंसे भारतीय नागरिकों की सहायता के लिए भारतीय दूतावास और विदेश मंत्रालय की ओर से भी लगातार समन्वय किया जा रहा है। अब तक 100 से अधिक भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाले जाने की जानकारी सामने आई है।
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शिविरों में जीवन सामान्य होने में लगेगा समय
बाढ़ से प्रभावित परिवारों के सामने तत्काल राहत के बाद अब पुनर्वास की बड़ी चुनौती है। हजारों लोग अपने घरों से दूर सुरक्षित स्थानों और अस्थायी ठिकानों में रहने को मजबूर हैं। सड़क, पुल, बिजली और संचार व्यवस्था को हुए नुकसान के कारण सामान्य जीवन पटरी पर लौटने में समय लग सकता है। नेपाल सरकार ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल प्राथमिकता लोगों की जान बचाना, लापता लोगों की तलाश, घायलों का उपचार और प्रभावित परिवारों तक तत्काल राहत पहुंचाना है। बाढ़ का पानी कम होने के बाद बड़े स्तर पर पुनर्निर्माण और पुनर्वास का काम शुरू होने की संभावना है।
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काठमांडो-मुग्लिन-नारायणगढ़ मार्ग पर फिर दौड़े वाहन
बढ़नी। नेपाल में 26 अगस्त को आई प्रलयकारी बाढ़ के बाद तबाह हुए सड़क और पुल नेटवर्क को बहाल करने का काम युद्धस्तर पर जारी है। चार दिन बाद रविवार को राहत की खबर आई, जब काठमांडो-मुग्लिन-नारायणगढ़ सड़क खंड पर वाहनों का आवागमन फिर शुरू हो गया। हालांकि, रसुवा, नुवाकोट और धादिंग के कई क्षेत्रों में पुल बह जाने और सड़कें टूटने से सामान्य जनजीवन अभी भी पूरी तरह पटरी पर नहीं लौट सका है।
बाढ़ और लगातार बारिश के कारण रविवार को सुबह काठमांडो-मुग्लिन-नारायणगढ़ सड़क मार्ग को एहतियातन कुछ समय के लिए बंद किया गया था। बाद में स्थिति सामान्य होने पर यातायात फिर से शुरू कर दिया गया। इससे काठमांडो से चितवन, नारायणगढ़ और दक्षिणी नेपाल की दिशा में जाने वाले यात्रियों को राहत मिली। अनुमान है कि जल्द ही अन्य मार्गों पर बहाली हो जाएगी।
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पृथ्वी राजमार्ग खुला, लेकिन सड़क की स्थिति पर नजर
बाढ़ के कारण बंद हुआ पृथ्वी राजमार्ग 28 अगस्त को मलबा हटाने के बाद खोला गया था। इस मार्ग के खुलने से काठमांडो से मुग्लिन होते हुए पोखरा और पश्चिमी नेपाल की ओर जाने वाले वाहनों को बड़ी राहत मिली। हालांकि, लगातार बारिश के कारण धादिंग जिले के कृष्णभीर क्षेत्र में सड़क धंसने और भूस्खलन का खतरा बना हुआ है। प्रशासन ने यात्रियों से सावधानी बरतने और यात्रा से पहले सड़क की ताजा जानकारी लेने की अपील की है।
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रसुवा तक सड़क संपर्क बहाल करना सबसे बड़ी चुनौती
बाढ़ से सबसे अधिक प्रभावित रसुवा जिले में सड़क और पुलों को व्यापक नुकसान पहुंचा है। रसुवागढ़ी-टिमुरे क्षेत्र और चीन सीमा की ओर जाने वाले मार्गों के कई हिस्से अभी भी क्षतिग्रस्त हैं। रसुवा के दूरदराज क्षेत्रों में सड़क संपर्क टूटने के कारण राहत और बचाव कार्यों में हेलीकॉप्टर का सहारा लेना पड़ रहा है। प्रभावित इलाकों में अस्थायी संपर्क मार्ग बनाने और सड़कों से मलबा हटाने का काम जारी है। बाढ़ की भयावहता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि नेपाल में करीब 41 पुलों को नुकसान पहुंचा है या वे बह गए हैं जबकि लगभग 42 किलोमीटर सड़क क्षतिग्रस्त हुई है। धादिंग, रसुवा और नुवाकोट जिलों में कई महत्वपूर्ण पुलों के टूटने से गांवों और बाजारों का संपर्क प्रभावित हुआ है। पुल टूटने के कारण कुछ स्थानों पर लोगों को राहत सामग्री और आवश्यक सेवाओं के लिए हवाई मार्ग पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
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बेली ब्रिज और वैकल्पिक मार्गों पर जोर
नेपाल सरकार और सड़क विभाग ने क्षतिग्रस्त संपर्कों को जल्द बहाल करने के लिए अस्थायी पुल और वैकल्पिक सड़क मार्ग तैयार करने की प्रक्रिया तेज कर दी है। जहां स्थायी पुलों के निर्माण में समय लगेगा, वहां बेली ब्रिज लगाने की संभावना पर काम किया जा रहा है। सड़क विभाग की प्राथमिकता काठमांडो को देश के अन्य हिस्सों से जोड़ने वाले प्रमुख मार्गों को सुरक्षित रूप से चालू रखना और बाढ़ प्रभावित जिलों तक राहत सामग्री पहुंचाने के लिए वैकल्पिक संपर्क तैयार करना है। काठमांडो-मुग्लिन-नारायणगढ़ मार्ग पर यातायात शुरू होने से भारत-नेपाल सीमा से आने वाले यात्रियों और मालवाहक वाहनों के लिए भी राहत की उम्मीद जगी है। यह मार्ग नेपाल के प्रमुख सड़क नेटवर्क से जुड़ा होने के कारण आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। हालांकि, प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि नदी किनारे और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में मौसम की स्थिति को देखते हुए कभी भी यातायात रोका जा सकता है।
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इन मार्गों की हुई बहाली
- काठमांडू-मुग्लिन-नारायणगढ़ मार्ग पर आवागमन फिर शुरू
- पृथ्वी राजमार्ग मलबा हटाने के बाद चालू
- काठमांडो से मुग्लिन और पोखरा की दिशा में राहत
- रसुवा और चीन सीमा की ओर कई सड़क संपर्क अब भी प्रभावित
- धादिंग, रसुवा और नुवाकोट में पुलों की मरम्मत और वैकल्पिक संपर्क पर काम
- करीब 41 पुलों को भारी नुकसान या वे बाढ़ में बह गए
- लगभग 42 किलोमीटर सड़क क्षतिग्रस्त
- कई कटे इलाकों में राहत पहुंचाने के लिए हेलीकॉप्टर का सहारा