सिद्धार्थनगर। विधान परिषद में शिक्षक विधायक ध्रुव कुमार त्रिपाठी के बिलो टेंडर के आधार पर निर्मित होने वाली सड़कों की गुणवत्ता पर सवाल उठाए हैं। इसके बाद शासन स्तर से जिले में पीडब्ल्यूडी को एक से दो प्रतिशत बिलो और 30 प्रतिशत बिलो टेंडर के आधार पर निर्मित हुई सड़कों की जांच के निर्देश दिए गए हैं।
इसके साथ ही एक वर्ष के अंदर बनी ऐसी सड़कों की सूची मांगी गई है। पीडब्ल्यूडी की कई सड़कों की गुणवत्ता जांच के दायरे में आ गई है, जिससे विभागीय अधिकारियों के साथ ही ठेकेदारों में हड़कंप मचा हुआ है।
विधान परिषद सदस्य ध्रुव कुमार त्रिपाठी ने सदन में कहा कि टेक्निकल व्यक्ति जिस सड़क का प्राक्कलन बनाता है उससे बिलो टेंडर के माध्यम से निर्माण कराने से गुणवत्ता प्रभावित होना तय है। उन्होंने कहा कि किसी सड़क का एक प्रतिशत बिलो पर टेंडर कर निर्माण होता है तो कहीं 30 प्रतिशत बिलो पर सड़क निर्माण हो रहा है। ऐसे में दोनों सड़कों की गुणवत्ता कैसे बेहतर हो सकती है।
मामले में राज्यमंत्री लोक निर्माण विभाग की ओर से ऐसी सड़क की सूची मांगने पर शिक्षक विधायक ने शासन स्तर से जांच की बात रखी। इसके बाद विधान परिषद के सभापति ने राज्यमंत्री लोक निर्माण विभाग को शासन स्तर से सिद्धार्थनगर की सड़कों की गुणवत्ता की जांच कराने के निर्देश दिए हैं। सहमति के बाद जिले में सड़कों की सूची तैयार की जाने लगी है।
विभागीय सूत्रों की मानें तो पीडब्ल्यूडी की वित्तीय एक वर्ष के भीतर बनी ऐसी सड़कों की सूची तैयार हो रही है, जिनका बिलो टेंडरिंग के आधार पर निर्माण हुआ है। अब इन सड़कों की जांच के बाद ही उनकी गुणवत्ता सामने आएगी। सड़क की गुणवत्ता पर सवाल: बर्डपुर क्षेत्र में एक वर्ष पूर्व मंझरिया अलीदापुर मार्ग पर अलीदापुर (गौरा) चौराहा से परसा आरसीसी सेंटर के पास तक लगभग 2.50 किमी सड़क का निर्माण भी बिलो टेंडर रेट पर कराया गया है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि निर्माण के समय इस सड़क की गुणवत्ता मानक के अनुरूप नहीं थी, जिसकी शिकायत भी की गई थी। यह सड़क तीन बार में बनाई गई है। इसमें परसा आरसीसी सेंटर के पास मंझरिया गांव के पुल तक लगभग 800 मीटर पिच रोड एक माह पहले बनी है और मंझरिया चौराहे से मंझरिया गांव के पुल तक लगभग 900 मीटर सीसी रोड डेढ़ माह पहले बनाई गई है।
पीएमजीएसवाई की सड़कें जांच के दायरे में: शिक्षक विधायक की तरफ से सदन में पीएमजीएसवाई की सड़कों की गुणवत्ता की जांच के सवाल पर विधान परिषद के सभापति की ओर से पीएमजीएसवाई की सड़कों की गुणवत्ता जांच कराने को कहा है। इससे विगत वर्षाें में जिले में बनी 20 से अधिक सड़कें जांच के दायरे में आ गयी है।
हालांकि इनमें अभी कई सड़कें अधूरी हैं। इस योजना के तहत निर्मित एफएनवीएस से महुलानी होते हुए सियरापार तक लगभग पांच किमी लंबी सड़क भी अब टूटने लगी है। सड़कों की गुणवत्ता जांच के निर्देश के बाद जिले में कार्यदायी संस्था के अधिकारियों के साथ ही ठेकेदारों की भी सरगर्मी बढ़ गई है।