सिद्धार्थनगर। तराई में ठंड अब अपने सबसे सख्त तेवर दिखाने को तैयार है। 26 दिसंबर से सर्दी का असर और तीखा होने के आसार हैं। अधिकतम और न्यूनतम दोनों के तापमान में गिरावट दर्ज की जाएगी, जिससे कंपकपी और बढ़ सकती है। बुधवार को तापमान की बात करें तो अधिकतम 16.3 और न्यूनतम 11.2 दर्ज किया गया। लेकिन, अब हालात और खराब होने वाले हैं, जो अगले चार से पांच दिनों तक रहेगा।
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार न्यूनतम तापमान सात से नौ डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है जबकि कोहरे का घनत्व भी बढ़ेगा। अभी जिले में अधिकतम तापमान 15 से 16 डिग्री और न्यूनतम 10 से 11 डिग्री के आसपास बना हुआ है, लेकिन उत्तर दिशा से चलने वाली सर्द हवाएं और नेपाल की पहाड़ियों से सटे होने के असर से तराई में ठंड और गलन बढ़ती जा रही है।
वहीं, जिले में लोगों की दिनचर्या पर गौर करें तो ठंड के इस दौर में गांव से शहर तक जनजीवन ठहर सा गया है। सुबह और देर रात कोहरा सड़कों पर दृश्यता कम रही। दिनभर गलन से लोगों को राहत नहीं मिल पा रही। बांसी, इटवा, डुमरियागंज और शोहरतगढ़ में लोग अलाव के सहारे समय काटते नजर आ रहे हैं।
न्यायालय परिसर, रेलवे स्टेशन, कलक्ट्रेट और विकास भवन में कर्मचारी और आमजन अलाव से चिपके दिखे। रेलवे और बस स्टेशन पर प्रतीक्षारत यात्रियों की हालत सबसे ज्यादा खराब रही। ठंडी हवाओं में शरीर कांपता रहा और प्लेटफार्मों पर बैठने की जगह तलाशते लोग अलाव के आसपास सिमटे रहे।
सिद्धार्थनगर रेलवे स्टेशन के रैन बसेरा की बात करें तो मंगलवार रात वह फुल था। गांवों में खेत-खलिहानों का काम ठंड के कारण प्रभावित है। सुबह के समय घना कोहरा छाने से पशुपालक और मजदूर देर से निकल रहे हैं। शहरों में भीड़-भाड़ वाले चौराहों, बाजारों और सरकारी दफ्तरों के बाहर अलाव जलते रहे, फिर भी गलन से राहत नहीं मिल पा रही है।
विद्यालयों में अवकाश न होने के कारण बच्चे ठिठुरते हुए आते-जाते नजर आए। स्कूल जाने वाले बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह दौर खासा चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है। वहीं, स्वास्थ्य विशेषज्ञ की राय है कि ठंड की मार तो हर किसी के सेहत पर प्रतिकूल असर डाल सकता है। इस मौसम में बच्चों और बुजुर्गों की सेहत पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।
ठंड का असर, सड़कों पर सन्नाटा, बाजार में रौनक दिखी कम: कड़ाके की ठंड और गलन के चलते लोग जरूरी काम से ही घरों से निकले। सुबह और शाम बाजारों में आम दिनों की तुलना में भीड़ बेहद कम रही। दोपहर में भी चहल-पहल नहीं लौटी और दुकानदार अलाव के बगल में बैठे नजर आए। ग्रामीण इलाकों से शहर आने वाले लोगों की संख्या घटी रही थी।
वहीं, बाजार पर असर देखने की मिली। इसमें बांसी, इटवा और डुमरियागंज के प्रमुख बाजारों में ग्राहकों की कमी, फुटपाथ दुकानदारों की बिक्री पर पड़ा सीधा असर, ठंड से बचाव के सामान (स्वेटर, टोपी, मफलर) की मांग जरूर बढ़ी। जल्दी दुकानें बंद कर घर लौटने को मजबूर हैं।