सिद्धार्थनगर। सीएमओ कार्यालय के वरिष्ठ मलेरिया निरीक्षक जयप्रकाश शुक्ल की गिरफ्तारी के बाद फर्जी दिव्यांगता प्रमाण पत्र प्रकरण में विभागीय स्तर पर भी हलचल तेज हो गई है। सूत्रों के अनुसार इनमें आंख और हाथ की दिव्यांगता से संबंधित प्रमाण पत्र शामिल हैं। जिन अभ्यर्थियों के नाम पर ये प्रमाण पत्र बनाए गए थे, वे प्रवेश के दौरान बोर्ड के सामने सामान्य पाए गए।
इसके बाद प्रमाण पत्रों की सत्यता पर सवाल उठा और जांच आगे बढ़ी। अब विभागीय स्तर पर पुराने प्रमाण पत्रों और रजिस्टर का मिलान किया जा रहा है। जांच में यदि इसी तरह के और प्रमाण पत्र सामने आते हैं तो फर्जी दस्तावेज के आधार पर नौकरी अथवा शैक्षिक संस्थानों में प्रवेश लेने के मामलों की संख्या बढ़ सकती है।
पूर्व में जारी दिव्यांगता प्रमाण पत्रों, रजिस्टर और संबंधित पटल के अभिलेखों की जांच शुरू कर दी गई है। जारी प्रमाण पत्रों का रजिस्टर से मिलान किया जा रहा है। चर्चा है कि इसके लिए छह डॉक्टरों की ड्यूटी भी लगाई गई है।
दिल्ली पुलिस की ओर से कुछ बिंदुओं पर जानकारी मांगे जाने की भी चर्चा है। हालांकि, सीएमओ कार्यालय के अधिकारी फिलहाल किसी तरह की लिखित जानकारी मांगे जाने से इन्कार कर रहे हैं। बुधवार को संबंधित पटल पर जिस तरह से फाइलों और रजिस्टर की जांच की गई।
16 में चार प्रमाण पत्र सिद्धार्थनगर से जारी : दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल को जांच के दौरान 16 फर्जी दिव्यांगता प्रमाण पत्र मिले थे। इनमें आठ बरेली, चार सिद्धार्थनगर और चार बदायूं से जारी होना बताया गया है। बरेली और बदायूं में कार्रवाई के बाद पूछताछ में सिद्धार्थनगर का नाम सामने आया।
इसके बाद दिल्ली पुलिस की टीम ने 10 सितंबर को सीएमओ कार्यालय के वरिष्ठ मलेरिया निरीक्षक जयप्रकाश शुक्ल को हिरासत में लिया था। मामला दिल्ली विश्वविद्यालय समेत अन्य शैक्षिक संस्थानों में प्रवेश से जुड़ा बताया जा रहा है। अभ्यर्थियों ने प्रवेश में लाभ लेने के लिए दिव्यांगता प्रमाण पत्र लगाए थे। अगस्त में हुई जांच में कुछ प्रमाण पत्र फर्जी पाए गए।