- भनवापुर क्षेत्र के कृषि विज्ञान केंद्र सोहना के वैज्ञानिकों ने दिया सुझाव, सरसों की बुवाई से पहले करें खेत की तैयारी
भनवापुर। इस समय सरसों की बुवाई का समय चल रहा है। किसान कुछ बातों का ध्यान रख बेहतर उपज प्राप्त कर सकते हैं। यह जानकारी देते हुए कृषि विज्ञान केंद्र सोहना के कृषि वैज्ञानिक डॉ. सर्वजीत ने बताया कि खेत की तैयारी, मृदा उपचार, उन्नतिशील प्रजातियों का चयन, बीज दर, बीज उपचार, खाद एवं उर्वरक की सही मात्रा सरसों की फसल के लिए जरूरी है।
डॉ. सर्वजीत ने बताया कि सरसों की बुवाई से पहले खेत की गहरी जुताई करें। मृदा उपचार के लिए ट्राईकोडर्मा एवं व्यूवेरिया वेसियाना एक किलोग्राम मात्रा को 30 किलो गोबर की खाद में मिलाकर मृदा उपचार कर सकते हैं, जिससे रोग एवं कीट प्रबंधन होगा। उन्होंने बताया कि संकर प्रजातियों का 1-1.5 किलो बीज दर प्रति एकड़ एवं दूसरी प्रजातियों का दो किलो बीज दर प्रति एकड़ प्रयोग करें। उन्नत प्रजातियों में आरएच 725, आरएच 749, आरएच 761, पूसा मस्टर्ड 26, पूसा मस्टर्ड 28, गिरिराज, आजाद महक, आजाद चेतना की बुवाई कर बेहतर उपज पाई जा सकती है। उन्होंने किसानों को उर्वरकों में प्रति एकड़ 100 किलो सिंगल सुपर फाॅस्फेट, 52 किलो यूरिया, 20 किलो म्यूरेट ऑफ पोटाश बुवाई के समय प्रयोग करने का सुझाव दिया।
डॉ. सर्वजीत ने बताया कि इसके अलावा यदि डीएपी के माध्यम से फॉस्फोरस देना है तो 35 किलो डीएपी प्रति एकड़ साथ में यूरिया 40 किलो,20 किलो म्यूरेट ऑफ पोटाश और 12 किलो बेंटोनाइट सल्फर प्रति एकड़ बुवाई के समय प्रयोग करें। बुवाई के 25 से 30 दिन बाद 52 किलो यूरिया प्रति एकड़ प्रयोग करें। बुवाई के बाद यदि खेत में पौधों की संख्या अधिक दिखाई देती है तो कुछ पौधों को उखाड़ कर संख्या कम करे पंक्ति से पंक्ति की दूरी 40-45 सेमी एवं पौधे से पौधे की दूरी 10 सेमी रखें। सिंचाई 25-30 दिन बाद हल्की करें।