सिद्धार्थनगर। नेपाल में आफत बन चुकी बारिश का असर जिले में दिखने लगा है। नेपाल से आने वाली सभी 11 नदियां और नाले उफान पर हैं। कुछ स्थानों पर बाढ़ के पानी ने फसल काे आगोश में ले लिया है तो कहीं आबादी की ओर बढ़ने से तटवर्ती गांव के साथ ही बांध पर खतरा मंडराने लगा है।
नदियों किनारे स्थित जर्जर बांधों में गैप भी है, जिसके भरोसे जिले की बड़ी आबादी की सुरक्षा का जिम्मा है। नदियों के लगातार बढ़ रहे जलस्तर से पिछले वर्षों से बाढ़ की तबाही झेल चुके लोग अभी से दहशत में है। कई जगहों पर लोग विभागीय अधिकारियों के साथ ही स्वयं बांधों की निगरानी के लिए रतजगा कर रहे हैं।
सबसे अधिक तबाही मचाने वाली बूढ़ी राप्ती खतरे के स्तर से चार सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। वहीं, नेपाल से निकलने वाली घोंघी नदी खतरे के निशान से 53 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। लंबे समय तक बाढ़ का कहर ढाने वाली राप्ती अभी खतरे के निशान से नीचे है, लेकिन यह महज 47 सेंटीमीटर दूर है। अफसरों का कहना है कि जिस हिसाब से राप्ती बढ़ रही है, आशंका है कि रात में खतरे के स्तर को पार कर जाएगी। ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है। जोगिया क्षेत्र के संगलदीप गांव में मार्ग डूब गया है और बाढ़ का पानी गांव की ओर बढ़ रहा है। लोगों को नाव का सहारा लेते देखा गया। वहीं, बांध पर दबाव बढ़ रहा है। बांधों की पड़ताल की गई तो कई जगह राप्ती नदी के बांध पर गैप और रैट होल पाए गए जो बड़ा संकट बड़ा उत्पन्न कर सकता है। वहीं, बाढ़ के खतरे को देखते हुए प्रशासन अलर्ट हो गया है।
बाढ़ आई तो फिर डूबेंगे दर्जनों गांव: शाहपुर। बीते वर्ष जुलाई माह जैसी बाढ़ आई तो दर्जनों गांवों के हजारों ग्रामीण बाढ़ से प्रभावित होंगे। ग्रामीणों ने बांध पर बने गैपिंग को भरने के लिए कई बार मांग कर चुके हैं, फिर भी जिम्मेदारों के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी है। वहीं कुछ ग्रामीण बाढ़ की त्रासदी को देखकर बांध की जद में आ रही जमीन काे सरकार के नाम बैनामा कर चुके हैं, लेकिन इसके बाद भी वहां की गैपिंग नहीं भरवाई गई। राप्ती नदी के तटवर्ती क्षेत्रों में शाहपुर से भोजपुर बांध निर्माण कार्य पिछले कई वर्षों से चल रहा है। लाखों रुपये खर्च किए जा चुके हैं। फिर भी लोगों को बांध निर्माण से कोई फायदा मिलते नजर नहीं आ रहा है।
बीते वर्ष दो स्थानों पर कटा था बांध : बीते वर्ष जुलाई माह के दूसरे सप्ताह में आई बाढ़ से शाहपुर-भोजपुर बांध पर पानी के दबाव से दो स्थानों पर बांध कट गया था। कटान स्थल को जिम्मेदार अबतक नहीं भरवा पाए। ग्रामीणों ने कहा कि जुलाई माह में आई बाढ़ में गैपिंग के रास्ते गांवों में पानी भर गया था। जलनिकासी का जिम्मेदार कोई समुचित व्यवस्था नहीं की थी। पानी का दाबाव बढ़ने से रमवापुर उर्फ नेबुआ गांव के पूर्व व पश्चिम दो स्थानों पर बांध कट गया था।
गांव में आ जाएगा बाढ़ का पानी : शाहपुर। भनवापुर ब्लॉक क्षेत्र के ग्राम पंचायत पेंडारी के ग्रामीण पप्पू चौधरी, रामफेर राम उजागिर, अनिल कुमार, दिलीप कुमार आदि लोगों ने कहा हमारे और मछिया गांव के बीच शाहपुर भोजपुर बांध पर गैपिंग है। बाढ़ से परेशान होकर सरकार को दो वर्ष पूर्व बांध निर्माण के लिए अपनी जमीन भी बैनामा कर दिया है। उसके बाद भी जिम्मेदार बांध का निर्माण नहीं करवाया। राप्ती नदी का जलस्तर और बढ़ा तो गांव पर गैपिंग के रास्ते से पेंडारी, धनोहरी, धनोहरा, सिरसिया, पंचउद, शाहपुर आदि गांवों में बाढ़ का पानी जाएगा।
बाढ़ के पानी से घिरा धनोहरा गांव शाहपुर। भनवापुर ब्लॉक क्षेत्र का राजस्व ग्राम धनोहर राप्ती नदी के बढ़ते जलस्तर से गांव बाढ़ के पानी से चारों तरफ से घिर गया है। ग्रामीण राम अदालत चौधरी ने कहा ऐसे ही राप्ती का जलस्तर बढ़ता रहा तो गांव में भी पानी घुस जाएगा। बीते वर्ष आई बाढ़ में घर बार छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा था। शाहपुर-भोजपुर बांध निर्माण बेमतलब साबित होते दिखाई दे रहा है, जिस हिसाब से जलस्तर बढ़ रहा है, संकट बढ़ सकता है।
कई स्थानों पर कटान : सकारपार। बांसी-पनघटिया बांध पर कई जगह ढलान बनने से बांध कटने की स्थिति में है। कहीं-कहीं रेनकट भी हो गया है, जिससे राप्ती का बढ़ता जलस्तर और लगातार हो रही बारिश से कभी खतरा हो सकता है। बांसी-पनघटिया बांध पर भगौतापुर गांव के पश्चिम तरफ ढलान बनने से बांध काटने लगा है। इसी तरह सोनवर्षा-गुलरिया लाला गांव के बीच बांध पर ढलान से बांध कट रही है। वहीं भगौतापुर गांव के पास बांध पर हो रहे रेनकट को बोरी से भर दिया गया है।
बांध पर टिकी ग्रामीणों की निगाहें: पकड़ी बाजार। तीन दिन से लगातार हो रही बारिश के चलते बूढ़ी राप्ती और बानगंगा नदी का जल स्तर बढ़ने से बंधे की सुरक्षा को लेकर सटे बसे गांव के लोगों की चिंता बढ़ गई है। शोहरतगढ़ तहसील क्षेत्र के लमुईया गांव के पास बंधे से कुछ दूरी पर जहां कटान हो रहा था, वहां पर सिंचाई विभाग की ओर से अभी तक कोई उचित बचाव कार्य नहीं किया गया। इससे बंधे के सटे बसे गांव के लोगों की धड़कनें बढ़ गई हैं। वहीं, बारिश के पानी से नैडहर गांव के पहले बंधे पर, नकाही गांव के पास बंधे पर, बैलिहवा गांव के पास बांध पर जगह-जगह रेनकट हो गए हैं, जिससे बंधे की सुरक्षा को लेकर लोग चिंतित हैं। लमुईया गांव के घनश्याम, गौरी, इंदर, झीनक, मंगरू, जय जयराम आदि गांव के लोगों का कहना है कि जहां पर कटान हो रही है उस जगह पर अभी तक सिंचाई विभाग ने कोई उचित इंतजाम नहीं किए हैं। राप्ती उफनाई तो मचाएगी तबाही: भनवापुर। पहाड़ों पर पिछले चार दिन से हो रही बारिश से नदियां उफान पर हैं। राप्ती का पानी शुक्रवार को सिंगारजोत, भरवठिया, बेतनार मुस्तहकम आदि स्थानों पर स्थिर रहा। क्षेत्र के फैज मोहम्मद, शिव प्रकाश मौर्य, रियाजउद्दीन, गजेंद्र शुक्ल, पंकज पांडेय, परशुराम दुबे, नफीस अहमद मलिक, भोला चौधरी आदि ने बताया कि अभी राप्ती नदी का जलस्तर स्थिर है। अगर राप्ती उफनाई तो निश्चित ही क्षेत्र में तबाही मचाएगी।
बांध पर नहीं हुआ काम, तेज से बढ़ रही राप्ती, अटकी सांस: बांसी। बूढ़ी राप्ती और राप्ती के तट पर बने सभी बांध जर्जर है। इन बांधों के रख-रखाव का जो काम हुआ है। वह ऊंट के मुझे में जीरा के समान है, जिससे नदी के तट पर बसे ग्रामीण काफी चिंतित है। इनका मानना है कि यदि नदियों में उफान आया तो यह बांध पानी का दबाव नहीं झेल पाएंगे। तीन वर्ष पूर्व बूढ़ी राप्ती के तट पर बने असोगवा नगवा बांध डढ़िया के पास कटने से हुई भीषण तबाही को लोग अभी भूल नहीं पाए हैं।