सिद्धार्थनगर। शिक्षा शास्त्र व्यावहारिक पहलुओं पर आधारित विषय है। इसमें सामाजिक व मनोवैज्ञानिक गुणों के आधार पर विद्यार्थी के सर्वांगीण विकास की बात की जाती है।
इसमें विद्यार्थी के मानसिक शक्तियों व संवेगात्मक विकास के साथ-साथ हस्तकौशल को विकसित करने का प्रयास किया जाता है। ऐसे में इसकी तैयारी करने के लिए रटने के जगह पर समझने की जरूरत है।
जय किसान इंटर कॉलेज सकतपुर सनई के शिक्षा शास्त्र के प्रवक्ता लाल आशुतोष प्रकाश ने बताया कि शिक्षा शास्त्र की तैयारी एनसीईआरटी व मानक पुस्तकों का अध्ययन, विगत वर्षों में पूछे गए प्रश्नों के आधार पर करना होगा। जो कुछ भी पढ़ें उसे लिखकर अभ्यास करने का प्रयास करें। उत्तर देते समय हेडिंग बनाए और उसे अंडरलाइन करें।
उन्होंने बताया कि शिक्षा शास्त्र को छात्र एक साधारण विषय के रूप में लेते है जबकि यह उतना आसान नहीं होता है। पढ़ाई के दौरान छात्र को हमेशा सभी विषयों को एक ही समान देखना चाहिए। शिक्षा शास्त्र की पढ़ाई से व्यावहारिक पहलु अच्छे होते हैं। जो शिक्षा के क्षेत्र में आगे और भी बेहतर सहयोग करते हैं। उन्होंने बताया कि इसमें अधिक नंबर लाने के लिए पुराने प्रश्न पत्र को भी दोहराए, जिससे यह परीक्षा के दौरान और भी आसान हो जाएगा।