भनवापुर। ब्लॉक क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण के उद्देश्य से ग्राम पंचायतों में बड़े पैमाने पर हर साल पौधरोपण अभियान सिर्फ कागजों तक सीमित रह गया है।
पौधरोपण, देखभाल, सिंचाई और सुरक्षा के नाम पर मनरेगा के तहत करोड़ों रुपये की निकासी कर ली गई जबकि दावों में रोपे गए पौधे हकीकत में कहीं नजर नहीं आ रहे हैं। इतना ही नहीं, जिन स्थानों, पशुचर भूमि, तालाबों के किनारे और सड़कों के आसपास पौधरोपण का दावा किया गया था, वहां आज जमीन पूरी तरह वीरान पड़ी है। भनवापुर ब्लॉक की 111 ग्राम पंचायतों में पिछले चार वर्षों (2022 से 2025) के दौरान करीब 6 लाख 10 हजार पौधों के रोपण का दावा किया गया है। आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2022 में 1 लाख 32 हजार, 2023 में 1 लाख 59 हजार, 2024 में 1 लाख 62 हजार और 2025 में 1 लाख 58 हजार पौधे लगाए जाने की रिपोर्ट दी गई। लेकिन, जमीनी हकीकत दावों से परे हैं। कहीं भी पौधा नहीं लगा हुआ है। वहीं, पौधों की सुरक्षा के नाम पर प्रति पौधे लगभग 300 रुपये खर्च दिखाया गया, जिसमें ट्री गार्ड और नेट जाली शामिल है।
इतना ही नहीं, इसके अलावा कीटनाशक दवाओं के नाम पर 200 से 300 रुपये प्रति पौधा तक का भुगतान दर्शाया गया। इस तरह प्रत्येक पौधे पर 500 से 600 रुपये तक का खर्च कागजों में दिखाकर भारी धनराशि के गबन करने की चर्चा है।
सूत्रों के अनुसार, ग्राम पंचायत सरोथर कठौतिया में 525 पौधों पर सुरक्षा के नाम पर करीब 1 लाख 57 हजार रुपये और कीटनाशक के नाम पर लगभग 13 हजार रुपये की निकासी की गई। वहीं, कठौतिया गोकुल पंचायत में सुरक्षा मद में करीब 1 लाख 10 हजार रुपये और दवाओं के नाम पर 10 हजार रुपये का भुगतान दिखाया गया। पूरे ब्लॉक में हरियाली सिर्फ फाइलों में नजर आ रही है।
बीडीओ डॉ. विनोद मणि त्रिपाठी ने कहा कि मामला संज्ञान में आया है और इसकी जांच कराई जाएगी। जांच के बाद दोषियों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।