सिद्धार्थनगर। पंचायत चुनाव की हलचल तेज होते ही बॉर्डर इलाके में नेपाली शराब की तस्करी अचानक बढ़ गई है। पहले बोरी से बॉर्डर पार से शराब की तस्करी करने वाले लोग अब ई-रिक्शा का सहारा लेने लगे हैं।
इस धंधे में अब बॉर्डर एरिया में रहने वाली महिलाएं भी कूद पड़ी हैं। वो ई-रिक्शा की मदद से नेपाली शराब की तस्करी कर रही हैं। पंचायत चुनाव में नेपाली शराब अहम भूमिका निभाती है। हालांकि अभी तक पंचायत चुनाव की तारीखों का ऐलान नहीं हुआ है, लेकिन प्रत्याशी इसकी तैयारियों में लग गए हैं।
इसी के मद्देनजर वो नेपाली शराब की मांग कर रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक बॉर्डर पर होने वाली शराब की तस्करी में प्रति शीशी 25-30 रुपये का फायदा होता है। एक हजार शीशी एक रात में पार हो गई तो 25 से 30 हजार रुपये का काम हो गया। तस्करी में नया ट्रेंड यह सामने आया है कि महिलाएं भी इस धंधे में शामिल हो चुकी हैं।
जनपद की 68 किलोमीटर सीमा नेपाल बाॅर्डर से लगी हुई है। सीमा पूरी तरह से खुली है और दोनों देश के लोग बिना रोकटोक के आते-जाते हैं।
मुख्य मार्ग पर हमेशा सुरक्षा एजेंसियां और लोकल थाने की पुलिस अलर्ट रहती है, लेकिन खुली हुई सीमा का लाभ दोनों देशों से तस्करी करने वाले खूब उठाते हैं। तस्करी सीजन और डिमांड पर निर्भर होती है। जिस देश में जिसकी मांग बढ़ती है, उसकी तस्करी शुरू हो जाती है। अब पंचायत चुनाव की सरगर्मी बढ़ते ही नेपाली शराब की तरस्करी तेज हो गई है।
कैसे संचालित हो रहा है तस्करी का नेटवर्क: बॉर्डर क्षेत्र के कई गांवों में अब नेपाली शराब का धंधा संगठित रूप ले चुका है। पहले यह धंधा सीमावर्ती आबादी के कुछ युवाओं तक सीमित था, लेकिन अब महिलाएं इस धंधे में उतर गई हैं। वह आसानी से झोली और बोरी शराब भरकर बॉर्डर पार कर लेती हैं और उन्हें कोई रोकता भी नहीं है। 30 नवंबर को बॉर्डर पर 240 शीशी नेपाली शराब के साथ दो महिलाएं पकड़ी गई थीं।
बॉर्डर से सटे एक गांव के रहने वाले इसहाक ने बताया कि सीजन के हिसाब से तस्करी होती है। चुनाव के समय शराब की तस्करी काफी बढ़ जाती है। मौजूदा समय में तस्करी पूरी योजना के तहत हो रही है। दो माह पहले नेपाली शरब को स्टोर कर लेते हैं, क्योंकि अधिसूचना लागू होने के बाद सख्ती बढ़ जाती है।
प्रत्याशी क्यों करते हैं शराब का इस्तेमाल: गांवों में पहचान बढ़ाने और समर्थक जुटाने के लिए प्रत्याशी शराब का सहारा लेते हैं। पीने के शौकीन लोग शराब की लालच में उक्त प्रत्याशी के समर्थन में रहते हैं। इस दौरान पार्टियों को खूब आयोजन होता है।