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Siddharthnagar News: मालिकाना हक और शहरी पहचान... सुविधाओं की आस में पंजीकरण करा रहे खास-ओ-आम

Sat, 24 Jan 2026 12:06 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
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शहर में बने हुए मकान। संवाद - फोटो : संवाद
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- सर्वे टीम द्वारा घर-घर जाकर मकानों का विवरण डिजिटल रिकॉर्ड में किया जा रहा दर्ज, गृहकर पंजीकरण के लिए उमड़े गृहस्वामी
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- पहली बार मिल रहे हैं मकान से जुड़े आधिकारिक दस्तावेज, सर्वे पूरा होने के बाद टैक्स और विकास योजनाओं को मिलेगी गति
सिद्धार्थनगर। शहरी व्यवस्था से बाहर इलाकों को अब नई पहचान मिलने की उम्मीद बढ़ी है। पहली बार नगर पालिका की पहचान, मालिकाना हक और शहरी सुविधाओं की आस में लोग पंजीकरण करा रहे हैं। आबादी और मकानों की संख्या की हकीकत जानने और भविष्य में होने विकास कार्यों के लिए नगर पालिका ने प्रशासन ने मास्टर प्लान तैयार किया है, इसलिए लोगों को नोटिस जारी करके गृहकर के दायरे में लाने का पहल शुरू की गई है। अभियान का असर भी दिखने लगा है।
पुराने शहर के ऐसे लाेग जो गृहकर के दायरे में नहीं थे और उन्होंने अब तक पंजीकरण नहीं कराया था, नोटिस मिलने के बाद वह भी खुद नगर पालिका कार्यालय पहुंचकर अपने मकानों का पंजीकरण कराने लगे हैं। वहीं, ऐसे लोग भी हैं जो बिना नोटिस के ही अपना पंजीकरण करा रहे हैं। इसमें पिपरा पांडेय, सनई, सकतपुर, मधुकरपुर, साड़ी, महनगा, भीमापार, रेहरा, पकड़ी और दतरंगवा जैसे इलाकों में यह सर्वे सिर्फ औपचारिकता नहीं बल्कि भविष्य की नींव के तौर पर देखा जा रहा है। विभागीय लोगों का कहना है कि आज पंजीकरण कराने से कल विकास का रास्ता खुलेगा।
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नगर पालिका सिद्धार्थनगर का पुराना शहर बहुत ही सीमित था, लगभग चार साल पहले सीमा विस्तार हुआ। सीमा विस्तार के पास आसपास की बड़ी आबादी शामिल हो गई। मगरा, कितने मकान और सड़क आदि की क्या स्थिति है, इसके बारे में किसी के पास सटीक जानकारी या कोई ठोस प्लान नहीं था। अब नगर पालिका की ओर से 40 हजार से ज्यादा मकान शहरी दायरे में आ रहे हैं। पहली पुरानी आबादी से को छोड़ दें तो नई बसी आबादी का नगर पालिका के पास अब तक कोई डाटा नहीं था। ऐसे में मकान सर्वे को लेकर लंबे समय से असमंजस की स्थिति थी। मगर जबसे नोटिस जारी कर कार्रवाई शुरू हुई है, इसके बाद अब स्थिति साफ होती दिख रही है।
नगर पालिका की ओर से चरणवार नोटिस जारी करने की प्रक्रिया शुरु की गई है। इसमें सर्वे टीम द्वारा घर-घर जाकर मकानों का विवरण डिजिटल रिकॉर्ड में दर्ज किया जा रहा है। पहली बार कई परिवारों को अपने मकान से जुड़े आधिकारिक दस्तावेज मिलेंगे, जिससे न सिर्फ पहचान मजबूत होगी बल्कि आने वाले समय में सरकारी योजनाओं का लाभ भी मिलना आसान होगा।
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चौहद्दी विवाद खत्म, मालिकाना हक होगा मजबूत

सर्वे फार्म में गृहस्वामी को खुद यह जानकारी देनी होती है कि उनके मकान के आसपास क्या स्थिति है। आरसीसी रोड है या अन्य सड़क, मकान का रकबा कितना है और किस श्रेणी में निर्माण है। इसी आधार पर अस्थायी गृह कर तय किया जाएगा, जो आगे चलकर स्थायी कर व्यवस्था का रूप लेगा। अधिकारियों का कहना है कि इससे वर्षों से चले आ रहे चौहद्दी और सीमा विवाद खत्म होंगे। मकान का रिकॉर्ड नगर पालिका में दर्ज होने से विवाद की स्थिति में सरकारी दस्तावेज मजबूत साक्ष्य बनेंगे। इसके साथ ही भविष्य में बड़े फायदे होंगे। जैसे शहरी सुविधाओं का रास्ता खुलेगा, सड़क, नाली, स्ट्रीट लाइट, पेयजल जैसी सुविधाओं की योजना अब इन इलाकों में बनाई जा सकेगी। नगर पालिका रिकॉर्ड में नाम दर्ज होने से सरकारी और शहरी योजनाओं का सीधा लाभ मिलेगा।
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संपत्ति की कीमत बढ़ेगी

मकान का वैधानिक पंजीकरण होने से जमीन-मकान की बाजार कीमत में इजाफा तय माना जा रहा है। ऐसा इसलिए कि ग्रामीण आबादी की तरह से होने और ठोस कागजात नहीं होने के कारण जमीन और मकान की उचित कीमत नहीं मिल रही थी। गृहकर में पंजीकरण के बाद मकान की चौहद्दी, रकबा, सड़क नाली सब कागजात में जिक्र होगा। ऐसे में कागजात पक्का होने और सहूलियत मिलेगी। इसके अलावा टैक्स से विकास का नक्शा दोनों बदल जाएगा। जैसे सड़क और मकान के रकबे के हिसाब से लिया जाने वाला गृह कर नगर पालिका की आय बढ़ाएगा, जिससे विकास कार्यों को गति मिलेगी। इसके साथ ही आज कराया गया पंजीकरण आने वाले वर्षों में मालिकाना हक, ऋण सुविधा और सरकारी मान्यता का आधार बनेगा।
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सर्वे नहीं, शहरी भविष्य की शुरुआत

नगर पालिका कार्यालय में लगातार बढ़ती भीड़ यह साफ संकेत दे रही है कि लोग अब मकान सर्वे को बोझ नहीं बल्कि अपने शहरी भविष्य की शुरुआत मान रहे हैं। आने वाले समय में यह सर्वे पूरे क्षेत्र के विकास का नक्शा बदलने वाला साबित हो सकता है। क्योंकि, उसी के हिसाब से शहर का विकास होगा। सड़क, बिजली पानी की सुनियोजित व्यवस्था आने वाले समय में नजर आएगी। जो विकास होगा, एक प्रकार से होगा और बड़े शहरों की तरह से दिखेगा।
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इस हिसाब से प्रति माह लगेगा टैक्स
24 मीटर से अधिक मार्ग वाले आरसीसी छत, पक्का मकान छह पैसा प्रति वर्ग मीटर
12 से 24 वर्गमीटर से तक चौड़े मार्ग पर 50 पैसा प्रति वर्ग मीटर
कच्चा भवन 30 पैसा प्रति मीटर अन्य पक्का भवन 40 पैसा वर्ग मीटर
9 से 12 मीटर चौड़ी सड़क पर कच्चा भवन 20 पैसा वर्ग मीटर
9 मीटर से कम सड़क पक्का भवन 20 पैसा प्रति वर्ग मीटर
कच्चा भवन 10 पैसा प्रति वर्गमीटर की दर से मासिक स्तर पर कर लगेगा।
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बोले लोग
नगर पालिका की ओर से अचानक एक नोटिस जारी हुआ था। इसके बारे में पता किया तो बताया गया कि यह गृहकर से संबंधित है, पंजीकरण कराने से भविष्य में लाभ मिलेगा। जल्द ही पंजीकरण करवाएंगे।
- सिंटू, कसौधन, हेडगेवार नगर
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नगर पालिका की ओर से एक नोटिस मिला है, इसमें मकान नंबर अलाॅट होना। फाॅर्म भरकर देने के लिए गया है। कर्मचारियों से जानकारी ली गई तो बताया गया कि पंजीकरण करवाने से कई प्रकार की सुविधा भविष्य में मिलेगा।
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- संतोष कुमार, रामनगर
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बोले जिम्मेदार
नगर में सर्वे के लिए नोटिस जारी किया जा रहा है कि गृहकर पंजीकरण करवाएं। चरण वार नोटिस जारी किया जाएगा। वहीं, कुछ लोग अपनी स्वेच्छा से आकर पंजीकरण करवा ले रहे हैं। इसमें नगरीय क्षेत्र में शामिल हर गृहस्वामी को पंजीकरण करवाना जरूरी है। इससे उन्हें भविष्य में कई प्रकार के लाभ मिल सकेंगे।
- अजय कुमार सिंह, ईओ, नगर पालिका परिषद सिद्धार्थनगर
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