सिद्धार्थनगर। पिछले सात माह से बजट के अभाव में जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति के लिए निर्मित हो रहे वाॅटर हेड टैंक आदि कार्य ठप हो गए हैं। दो हजार करोड़ रुपये लागत की इन पाइप पेयजल परियोजनाओं के निर्माण में तेजी लाने के लिए वर्तमान में 100 करोड़ रुपये बजट की दरकार है।
कहीं टैंक बनाकर छोड़े गए हैं तो कहीं पाइप और टोटी लगाना भूल गए। इनमें कई परियोजनाओं को एक वर्ष पहले ही पूरा होना था, लेकिन धनाभाव के चलते पांच सौ से अधिक परियोजनाएं अधूरी पड़ी है। इस कारण जिले के एक लाख से अधिक परिवार आठ लाख रुपये सिर्फ पीने के पानी पर खर्च कर रहे हैं।
जल जीवन मिशन के जिले के 2067 गांवों को पेयजल से संतृप्त करने के लिए पूर्व में संचालित वाॅटर सप्लाई के अतिरिक्त 762 नई परियोजनाएं बननी थीं। इसके तहत वर्ष 2019-20 में 176 परियोजना पर कार्य शुरू हुआ था, जिनमें कुछ परियोजनाएं पूरी हुई, कुछ अधूरी पड़ी हैं, लेकिन अधिकांश परियोजनाएं संचालित नहीं हो सकी हैं। इसके बाद 163 और 423 परियोजनाओं पर कार्य शुरू हुआ था।
इनमें भी कई पर काम अधूरे पड़े हैं। बता दें कि प्रत्येक ओवरहेड टैंक पाइप पेयजल परियोजना के निर्माण पर दो से चार करोड़ रुपये खर्च किए जाने हैं। इनमें तीन से अधिक गांव के टोले शामिल होने पर परियोजना की लागत बढ़ जाती है। इसके तहत एक लाख लीटर क्षमता की टंकी बनानी है। साथ ही बाउंड्रीवाॅल, पंपघर, बोरिंग व संबंधित गांवों के प्रत्येक घर तक वाॅटर सप्लाई पाइपलाइन बिछाई जानी है। नौगढ़ ब्लॉक के अहिरौली ग्राम में दो वर्ष पूर्व शुरू हुआ पानी टंकी का निर्माण कार्य पर नजर दौड़ाएं तो पेयजल परियोजनाओं की स्थिति साफ हो जाएगी। यहां बिना टंकी निर्माण कराए, सड़क खोदकर पाइपलाइन बिछा दी गई, जिससे ग्रामीणों को पानी तो मिला नहीं आवागमन में भी सांसत झेलनी पड़ रही है।
एक वर्ष पहले होना था पूरा, अब भी अधूरा सकारपार। बांसी ब्लॉक क्षेत्र के तेजगढ़ गांव में जल जीवन मिशन के तहत 220.77 लाख रुपए की लागत से पानी टंकी का निर्माण होना था, लेकिन काम पूरा नहीं हो सका। प्लांट पर लगे बोर्ड के अनुसार निर्माण कार्य पांच अप्रैल 2023 को शुरु होकर पांच दिसंबर 2024 को पूरा होना था। अधूरे प्रोजेक्ट से यहां चार हजार आबादी शुद्ध पानी की किल्लत से जूझ रही है। इसी तरह कदमहवा गांव के टोला रामापुर और तिवारीपुर गांव में करोड़ों रुपये की लागत से बन रहा पानी टंकी का निर्माण कार्य अधूरा पड़ा है। कदमहवा ग्रामसभा में शामिल कुशलपुर, सेमरा, रमवापुर गांव की छह हजार आबादी काे पेयजल सप्लाई का इंतजार है। तिवारीपुर में अभी केवल तीन तरफ से बाउंड्रीवॉल और पंपहाउस का काम हुआ है। अधूरे कार्य से गांव की तीन हजार आबादी को शुद्ध पेयजल नसीब नहीं हो रहा है।