भनवापुर। क्षेत्र के सेमरा बनकसिया में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में दूसरे दिन मंगलवार को कथा वाचक पं. विनोद कृष्ण शास्त्री ने कहा कि मानव के श्रीमद्भागवत कथा के श्रावण मात्र से सभी पाप कट जाते हैं और वह मृत्यु लोक के आवागमन से मुक्ति प्राप्त कर सकते हैं। कथा में धुंधकारी के जन्म व मुक्ति के कथा का रसपान कराया।
कथा को आगे बढ़ाते हुए पं. शास्त्री ने बताया कि मानव के मुक्ति का मार्ग श्रीमद्भागवत कथा से ही खुलता है। उन्होंने बताया कि महाभारत की समाप्ति के बाद कलयुग के आगमन की आहट के बीच राजा परीक्षित जंगल शिकार के लिए गए, जहां कलयुग के प्रभाव से परीक्षित का मति भ्रमित हो गया और प्यास से व्याकुल होकर पानी की तलाश में शमीक ऋषि के आश्रम पहुंचे, जहां ऋषि को ध्यानमग्न देख उन्हें अपशब्द बोलने लगा। पास पड़े मृत सर्प को उनके गले में डाल लिया और वहां से लौट गया। नदी पर स्नान करने गए शमीक ऋषि के पुत्र शृंगी ऋषि को अन्य बच्चों ने उनके पिता के साथ राजा के दुर्व्यवहार की सूचना दी गई।