सिद्धार्थनगर। जिले के करीब साढ़े तीन हजार आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम (यूपीसीओएस) नई उम्मीद लेकर आया है। अब एजेंसी बदलने पर पुराने कर्मियों को मनमाने ढंग से नहीं हटाया जा सकेगा और हर महीने पांच तारीख तक वेतन, ईपीएफ-ईएसआई व डिजिटल निगरानी का प्रावधान किया गया है।
जिले में स्वास्थ्य विभाग, मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल, नगर निकाय, ब्लॉक, पंचायत, शिक्षा और बाल विकास समेत कई विभागों में आउटसोर्स कर्मचारी कार्यरत हैं। नई व्यवस्था के तहत इन कर्मचारियों का रिकॉर्ड यूपीसीओएस पोर्टल पर दर्ज किया जाएगा, जिससे नियुक्ति, उपस्थिति, भुगतान और शिकायत निस्तारण की प्रक्रिया डिजिटल प्लेटफॉर्म से संचालित होगी।
जिले में स्वास्थ्य विभाग, मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल, नगर निकाय, ब्लॉक, पंचायत, शिक्षा और बाल विकास समेत कई विभागों में आउटसोर्स कर्मी काम कर रहे हैं। लंबे समय से इन कर्मचारियों की प्रमुख शिकायतें एजेंसी के स्तर पर वेतन में देरी, कटौती और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी रही हैं। यूपीसीओएस में डिजिटल रिकॉर्ड और भुगतान व्यवस्था से इन समस्याओं को दूर करने का दावा किया गया है लेकिन व्यवस्था लागू होने के बाद निगरानी सबसे अहम होगी।
पांच तारीख तक वेतन लेकिन निगरानी जरूरी : परिवहन विभाग में कार्यरत कर्मचारी शिवेंद्र गुप्ता बताते हैं कि यूपीसीओएस में हर महीने की पांच तारीख तक मानदेय भुगतान का प्रावधान किया गया है। ईपीएफ, ईएसआई, मेडिक्लेम और दुर्घटना बीमा जैसी सामाजिक सुरक्षा सुविधाओं को भी व्यवस्था से जोड़ा गया है। इससे कर्मचारियों को समय पर भुगतान और सामाजिक सुरक्षा मिलने की उम्मीद है। नगर पालिका परिषद में कार्यरत संदीप मिश्रा कहते हैं कि जिले में व्यवस्था लागू होने के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि एजेंसी वास्तव में समय पर वेतन भुगतान करती है या नहीं। ईपीएफ और ईएसआई की कटौती होने के बाद संबंधित राशि कर्मचारी के खाते में समय से जमा होती है या नहीं, इसकी भी निगरानी जरूरी होगी। केवल वेतन पर्ची में कटौती दिखना पर्याप्त नहीं होगा।