कपिलवस्तु। बुद्ध की जन्मभूमि लुंबिनी में 26 और 27 जनवरी को तीसरा नेपाल बर्ड फेयर का आयोजन होगा। इसका उद्देश्य पक्षी संरक्षण, जैव विविधता के प्रति जागरूकता और बर्ड-वॉचिंग आधारित सतत पर्यटन को बढ़ावा देना है। इस दो दिवसीय आयोजन में देश-विदेश के पक्षी वैज्ञानिक, विशेषज्ञ, शोधकर्ता और संरक्षण से जुड़े स्टेकहोल्डर्स हिस्सा लेंगे।
नेपाल बर्ड फेयर कमेटी के कोऑर्डिनेटर और पोखरा बर्ड सोसाइटी के अध्यक्ष मानशांत घिमिरे ने बताया कि बर्ड फेयर का मुख्य उद्देश्य नेपाल में पाई जाने वाली पक्षी प्रजातियों, जैव विविधता और महत्वपूर्ण आवासों जैसे वेटलैंड्स और जंगलों के संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। साथ ही स्थानीय समुदायों, गाइड्स, शोधकर्ताओं, सरकारी एजेंसियों और संरक्षण संगठनों के बीच ज्ञान के आदान-प्रदान, सहयोग और नेटवर्किंग को मजबूत करना भी इसका लक्ष्य है।
उन्होंने कहा कि यह बर्ड फेयर देसी और विदेशी पक्षी वैज्ञानिकों, विशेषज्ञों, बर्ड काउंटर्स और पक्षी संरक्षण से जुड़े विभिन्न स्टेकहोल्डर्स को एक मंच पर लाने के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है। पोखरा बर्ड सोसाइटी द्वारा आयोजित और ग्रीन यूथ लुंबिनी द्वारा सह-आयोजित इस कार्यक्रम को लुंबिनी कल्चरल म्युनिसिपैलिटी और नेपाल टूरिज्म बोर्ड द्वारा प्रोत्साहित किया जा रहा है। नेपाल बर्ड कंजर्वेशन एसोसिएशन, लुंबिनी डेवलपमेंट फंड और लुंबिनी बुद्धिस्ट यूनिवर्सिटी भी इस आयोजन में साझेदार हैं। कार्यक्रम के तहत 21 और 22 जनवरी को लगभग 30 स्कूलों में विद्यार्थियों को पक्षियों के महत्व, उनके आवास, संकट के कारणों और संरक्षण की आवश्यकता व प्रयासों के बारे में जानकारी दी जाएगी। इसी तरह 23 और 24 जनवरी को लुंबिनी के 30 स्थानीय गाइडों को पक्षियों की पहचान से संबंधित प्रशिक्षण दिया जाएगा।