- भनवापुर क्षेत्र के डिवलीडीहा मिश्र में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में बताया महात्म
भनवापुर। क्षेत्र के डिवलीडीहा मिश्र में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा के पहले दिन बृहस्पतिवार को शाम अवध धाम से पधारे कथा वाचक राकेश शास्त्री ने ज्ञान वैराग्य भक्ति की कथा श्रवण कराया। उन्होंने बताया बिना कथा सत्संग के ज्ञान वैराग्य भक्ति की प्राप्ति नहीं हो सकती है।
कथा श्रवण कराते हुए राकेश शास्त्री ने बताया कि धुंधकारी गोकर्णजी की अद्भुत कथा का भी श्रवण कराया। कथा के दौरान बताया की भागवत कथा श्रवण करने से घर के पितृदोष की शांति मिलती है। उन्होंने बताया कि आत्मदेव ने पुत्र के लिए जंगल में जाकर मरने का निश्चय किया। संत की कृपा से फल प्राप्ति के द्वारा पुत्र की प्राप्ति हुई। गोकर्णजी ने महान ज्ञानी हुए धुंधकारी महा दुष्ट हुआ धुंधकारी मरने के बाद प्रेत बन कर सबको दुख देने लगा भागवत कथा श्रवण करा करके धुंधकारी प्रेत योनि से मुक्ति कराया धुंधकारी के लिए भगवान के धाम से विमान आया विमान में बैठ करके धुंधकारी की भागवत की महिमा गाते हुए जय-जय कर करते हुए भगवान के धाम में पहुंचे। भागवत कथा से प्रेत बाधा की शांति होती है पितृ दोष की शांति होती है। भागवत कथा से घर की समस्त दुख दरिद्र तथा पाप कष्ट दूर होता है, सुख शांति प्राप्त होती है। भगवान की कृपा की प्राप्ति होती है। इस दौरान गायत्री प्रसाद मिश्र, महंथ मिश्र, डॉ. रमेश मिश्र, शिवपूजन दूबे, पं. केशवानंद शास्त्री आदि मौजूद रहे।