घोसियारी। एक तरफ जहां सरकार देसी गोवंश को बढ़ावा देने की बात कह रही है। वहीं, विभागीय उदासीनता कर्मचारियों की कमी व देसी गोवंश के सीमन की अनुपलब्धता सरकार के मंशा पर पानी फेर रही है।
कहीं चिकित्सक की कमी तो कहीं जर्सी के सीमन ही उपलब्ध होने से पशुपालकों को देसी प्रजातियों के सीमन के लिए प्राइवेट कर्मचारियों का सहारा लेना पड़ रहा है। साथ में अच्छी प्रजाति के गोवंश के लिए अतिरिक्त शुल्क भी देना पड़ रहा है। मिठवल ब्लॉक के कुर्तियां अस्पताल पर कुल तीन न्याय पंचायत धमौरा, सेखुई, मसैचा के लगभग 50 गांव के लगभग 4000 पशुओं के इलाज का जिम्मा है। लेकिन, चिकित्सक विहीन अस्पताल लोगों के लिए बेमतलब साबित हो रहा है।
गायों की देसी नस्लों में लगातार कमी हो रही है जबकि देसी नस्लों में गिर, थारपारकर, हरियाणा, साहिवाल गायों की दुग्ध उत्पादन क्षमता 10 से 15 लीटर प्रतिदिन की है। पशुपालक बताते हैं कि विभाग में मनचाहा सीमन न मिलने के कारण प्राइवेट चिकित्सक से ढाई सौ से 300 रुपये में कृत्रिम गर्भाधान करना पड़ रहा है।