- इस बार खेलो इंडिया के लिए केंद्र सरकार ने एक हजार करोड़ रुपये बजट रखा
- सिद्धार्थनगर में कोच के अभाव में पलायन को मजबूर हैं खिलाड़ी
केंद्रीय बजट 2026 में केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने खेलो इंडिया मिशन की घोषणा की थी। इसका लक्ष्य अगले 10 सालों में भारत के खेल क्षेत्र को पूरी तरह बदलना है। इससे खिलाडि़यों को बेहतर मंच मिलेगा। इसके लिए 3,794.30 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है। इसके अलावा बजट में खेलो इंडिया योजना को 800 करोड़ से बढ़ाकर 1,000 करोड़ रुपये किया गया है। सरकार ने खेल को बढ़ावा देने के लिए अपना खजाना ही खोल दिया, लेकिन सिद्धार्थनगर में हकीकत कुछ और ही है। केंद्रीय बजट से यहां के खिलाडि़यों में कोई उत्साह नहीं दिखा। कोच, संसाधन और नियमित प्रशिक्षण की भारी कमी से जूझ रहे ये खिलाड़ी अब पलायन करने को मजबूर हो रहे हैं।
स्थानीय खिलाड़ियों का मानना है कि कोच की नियुक्ति न होने और नियमित प्रशिक्षण के अभाव की वजह से खिलाड़ी अब जिला छोड़ने को मजबूर हो रहे हैं। इससे सिद्धार्थनगर में खेलो इंडिया के मिशन को एक बड़ा धक्का लग रहा है। जबकि खेलो इंडिया मिशन का लक्ष्य कोच, प्रशिक्षण केंद्र और प्रतिभा विकास को मजबूत आधार देना है। क्रियान्वयन की धीमी गति और कोच की कमी की वजह से खिलाड़ी पलायन करने को मजबूर हैं।
स्थानीय रिपोर्ट्स के मुताबिक पिछले कुछ वर्षों में जिला स्पोर्ट्स स्टेडियम में कई बार कोच की नियुक्ति के लिए पत्राचार किया गया है, लेकिन अधिकांश खेलों में अभी भी कोच की नियुक्ति नहीं हुई है। जिससे कई खिलाड़ी नियमित अभ्यास छोड़कर अन्य शहरों में चले गए हैं या खेल ही छोड़ रहे हैं। जानकार बताते हैं कि यह स्थिति खेलो इंडिया जैसी राष्ट्रीय योजना के उद्देश्यों से विपरीत दिखती है, जहां केंद्रीय खेल बजट और मिशन का उद्देश्य कोचिंग‑सक्षम सेंटरों और प्रशिक्षकों की तैनाती कर युवाओं को राष्ट्रीय स्तर तक ले जाना बताया गया है।
इसके जीवंत उदाहरण करीब एक साल से सेल्फ ट्रेनिंग कर रहे एथलीट उज्ज्वल पांडेय हैं। वह इस समय 400 मीटर दौड़ की तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि उन्हें हरियाणा के हिसार में प्रशिक्षक द्वारा भेजे गए वर्कआउट के अनुसार अभ्यास करना पड़ता है, क्योंकि स्थानीय स्टेडियम में कोच उपलब्ध नहीं हैं। साल 2021 में एथलेटिक्स कोच न मिलने के चलते उन्हें हरियाणा जाकर प्रशिक्षण लेना पड़ा था। गंभीर बीमारी के कारण करीब डेढ़ साल तक वह प्रैक्टिस नहीं कर पाए थे। अब वह सेल्फ ट्रेनिंग कर रहे हैं।सिर्फ उज्जवल ही नहीं ऐसे बहुत से खिलाड़ी हैं जो सेल्फ ट्रेनिंग कर रहे हैं। प्रतिभावान कबड्डी खिलाड़ी रहीं अनुष्का बताती हैं कि कई खिलाड़ी कभी‑कभी स्टेडियम आते हैं और फिर बिना दिशा-निर्देश अभ्यास करके वापस चले जाते हैं, जिससे धीरे-धीरे उनका सपना टूट रहा है। इन खिलाडि़यों के मुताबिक युवा खिलाडि़यों का पलायन रोकने के लिए स्टेडियम में कोच की नियुक्ति बहुत ही जरूरी है। साथ ही स्टेडियम में जिम, सिंथेटिक ट्रैक, कुश्ती मैट और फुटबॉल/हॉकी ग्राउंड बनाना, स्वास्थ्य और मेडिकल सपोर्ट सुनिश्चित करना, आर्थिक सहायता या स्कॉलरशिप देना, राज्य और राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग लेने के अवसर प्रदान करना और मानसिक व तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराना आवश्यक है ताकि खिलाड़ी अपने जिले में रहकर खेल में आगे बढ़ सकें।
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कोच की नियुक्ति के लिए पत्राचार किया जाएगा। खिलाड़ियों को खेल के क्षेत्र में बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। जल्द ही स्टेडियम की अन्य व्यवस्थाओं को भी दुरुस्त कराया जाएगा।
आले हैदर, प्रभारी क्रीड़ा अधिकारी (आरएसओ)