- विनियमित क्षेत्र नौगढ़ का अब तक नहीं हुआ सर्वे, 23 साल से सीमा विस्तार भी लंबित
- नगर पालिका में शामिल पकड़ी समेत कई गांवों में बिना नक्शा पास कराए हो रहे निर्माण
- अमृत 2.0 के तहत जीआईएस आधारित महायोजना की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की तैयारी
सिद्धार्थनगर। शहर के सुनियोजित विकास के लिए अमृत 2.0 के तहत जीआईएस आधारित महायोजना तैयार करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की पहल हुई है। इसके बाद शहर के विकास का भविष्य तय होगा। सर्वे पूरा नहीं होने और विनियमित क्षेत्र का सीमा विस्तार लंबित रहने से शहर के आसपास तेजी से नई कॉलोनियां बस रही हैं। इससे भविष्य में सड़क, नाली, पार्क और अन्य नागरिक सुविधाओं के लिए जमीन चिह्नित करने में मुश्किल हो सकती है।
भारत सरकार की अमृत 2.0 योजना की उप योजना के तहत नगर पालिका सिद्धार्थनगर को जीआईएस आधारित महायोजना संरचना के स्टेट एक्शन प्लान में शामिल किया गया है। इसके तहत नगर की महायोजना संरचना और आधार मानचित्र तैयार किए जाने हैं। मुख्य नगर एवं ग्राम नियोजक अनिल कुमार मिश्र ने इस संबंध में पत्र भेजा था। इसके बाद जिला प्रशासन ने विनियमित क्षेत्र नौगढ़ के बोर्ड की बैठक में अभिकरण घोषित करने का प्रस्ताव पारित किया और मई 2026 में संबंधित अभिलेख मुख्य नगर एवं ग्राम नियोजक को भेज दिए।
जीआईएस आधारित मानचित्र से शहरी क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति और भूमि उपयोग का आकलन कर नियोजित विकास की रूपरेखा तैयार करने में मदद मिलेगी। हालांकि, महायोजना तैयार करने के लिए सर्वे और आगे की प्रक्रिया पूरी होना जरूरी है।
1978 में बना था विनियमित क्षेत्र
शहर के नियोजित विकास के लिए वर्ष 1978 में तत्कालीन बस्ती जनपद के नौगढ़ तहसील मुख्यालय और आसपास के 34 राजस्व गांवों को शामिल कर विनियमित क्षेत्र नौगढ़ बनाने की अधिसूचना जारी की गई थी। जुलाई 2003 में इसमें छह और गांव जोड़े गए। इस तरह विनियमित क्षेत्र में कुल 40 राजस्व गांव शामिल हो गए। इनके विकास के लिए महायोजना-2021 बनाई गई थी, जिसमें भूमि के उपयोग निर्धारित किए गए थे। महायोजना तैयार करने के लिए वर्ष 2002 में सर्वे कराया गया था। इसकी अवधि समाप्त हुए पांच साल बीत चुके हैं लेकिन नई महायोजना-2031 तैयार नहीं हो सकी है। करीब पांच साल पहले तत्कालीन जिलाधिकारी की अध्यक्षता वाली समिति ने सर्वे के लिए एक निजी कंपनी का चयन किया था। कंपनी को निर्धारित धनराशि की पहली किस्त भी दी गई लेकिन सर्वे पूरा नहीं हो सका। नई महायोजना के लिए पुराने क्षेत्र के साथ विस्तार में शामिल होने वाले गांवों का भी सर्वे होना है।
पार्क और सार्वजनिक सुविधाओं की जमीन पर निर्माण
महायोजना-2021 में ग्रीन बेल्ट, पार्क, बस अड्डे और अन्य सार्वजनिक सुविधाओं के लिए जमीन चिह्नित की गई थी। इसके बावजूद कई स्थानों पर निर्माण होने की बात सामने आई है। वर्ष 2004 की रिपोर्ट के अनुसार, इंदिरानगर में करबला के पास और बेलसड़ मोहल्ले में प्रस्तावित पार्क की जमीन पर मकान बन गए। बर्डपुर मार्ग पर प्रस्तावित बस अड्डे और विद्युत उपकेंद्र की जमीन पर भी निर्माण होने की जानकारी दी गई है। बांसी मार्ग पर प्रस्तावित ट्रांसपोर्ट नगर और कुछ महत्वपूर्ण सड़कों के लिए चिह्नित स्थानों पर भी मकान बन गए हैं। वहीं, सिंहेश्वरी मंदिर के आसपास, बसडिलिया, भीमापार, पकड़ी, मधुकरपुर, सनई, थरौली और जगदीशपुर समेत कई स्थानों पर नई कॉलोनियां बस रही हैं। ऐसे में नई महायोजना तैयार करते समय सड़क, जल निकासी, पार्क और अन्य सार्वजनिक सुविधाओं के लिए पर्याप्त जमीन चिह्नित करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
पकड़ी में नक्शा पास कराने की समस्या
नगर पालिका के सीमा विस्तार में शामिल पकड़ी राजस्व गांव अभी विनियमित क्षेत्र का हिस्सा नहीं है। इस कारण यहां भवन निर्माण के नक्शे पास कराने में परेशानी होने की बात सामने आई है। स्थानीय निवासी जटाशंकर अग्रहरि के अनुसार, गांव में बिना नक्शा पास कराए मकान और संस्थानों का निर्माण हो रहा है। सड़क, नाली और पार्क के लिए पर्याप्त जमीन नहीं छोड़ी जा रही है, जिससे भविष्य में नागरिक सुविधाएं विकसित करने में दिक्कत आ सकती है। नगर पालिका के सीमा विस्तार के बाद कई ऐसे गांव शहरी क्षेत्र में शामिल हुए हैं, जो अभी विनियमित क्षेत्र का हिस्सा नहीं हैं। नई महायोजना के लिए इन क्षेत्रों का सर्वे करने के साथ विनियमित क्षेत्र का दायरा बढ़ाने की जरूरत है। अनुमान है कि विस्तार के बाद इसमें शामिल गांवों की संख्या 40 से बढ़कर 50 से 55 तक हो सकती है। हालांकि, अंतिम स्थिति सर्वे और निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
बोले जिम्मेदार
नगर पालिका सिद्धार्थनगर के नियोजित विकास के लिए सर्वे कराकर नई महायोजना-2031 तैयार की जानी है। इसके लिए नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग से पत्राचार किया जाएगा।
- निखिल चक्रवर्ती, एसडीएम नौगढ़ एवं प्रभारी विनियमित क्षेत्र नौगढ़