- 32 हजार फर्जी ढक्कन और 12 हजार बारकोड बरामद, शराब की दुकान सील, पानी मिलाकर तैयार करते थे नकली शराब
- बांसी पुलिस, एसओजी, सर्विलांस और आबकारी विभाग ने की संयुक्त कार्रवाई, एक आरोपी हरदोई जिले का रहने वाला
सिद्धार्थनगर। जिले में अंग्रेजी शराब की ब्रांडेड बोतल में पानी मिलाकर पैकेजिंग कर नई शराब तैयार करने वाले गिरोह का बृहस्पतिवार को पुलिस और आबकारी विभाग ने भंडाफोड़ किया है। बांसी पुलिस, एसओजी, सर्विलांस सेल और आबकारी विभाग की संयुक्त टीम ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से 32,472 नकली ढक्कन, 12,740 फर्जी बारकोड (सील रैपर), विभिन्न कंपनियों की 16 बोतल मिश्रित अंग्रेजी शराब, शराब तैयार करने में प्रयुक्त उपकरण और अन्य सामान बरामद किए हैं।
एसपी डॉ. अभिषेक महाजन ने पुलिस लाइंस में प्रेसवार्ता में बताया कि प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि यह नेटवर्क सिद्धार्थनगर ही नहीं बल्कि आसपास के जिलों और नेपाल सीमा से सटे क्षेत्रों तक फैला हुआ था। एसपी के अनुसार, बुधवार को इटवा रोड स्थित रतन सेन सिंह इंटर कॉलेज के पास चेकिंग के दौरान मुखबिर की सूचना पर कार्रवाई की गई। इस दौरान थाना बांसी के ग्राम देवियापुर नकरटहा निवासी बलराम जायसवाल और हरदोई जिले के थाना पाली क्षेत्र के अन्नगपुर शाबा रोड निवासी प्रदीप कुमार को गिरफ्तार किया गया।
प्रदीप कंपोजिट अंग्रेजी शराब दुकान, पटखौली नंबर-2, डुमरियागंज पर सेल्समैन के रूप में कार्यरत था। पुलिस के अनुसार प्रदीप को खाली बोतलों में शराब और पानी मिलाकर, उन पर नकली ढक्कन व फर्जी क्यूआर कोड स्टीकर लगाकर नई अंग्रेजी शराब तैयार करते और बेचते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया।
आरोपी बलराम जायसवाल की निशानदेही पर पुलिस ने कोइलहवा स्थित सुभाष नगर में किराए के मकान की तलाशी ली। यहां विभिन्न ब्रांडों के नकली ढक्कन, बारकोड, शराब की पैकिंग में प्रयुक्त सामग्री, इलेक्ट्रॉनिक वेट मशीन, ढक्कन खोलने के उपकरण और अन्य सामान बरामद किए हैं। इसके अलावा संबंधित दुकान से आईबी, आइकॉनिक और आरएस ब्रांड की 16 बोतल संदिग्ध मिश्रित अंग्रेजी शराब भी बरामद की गई।
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नेपाल सीमा तक होती थी सप्लाई
- पूछताछ में बलराम जायसवाल ने पुलिस को बताया कि उसने कोइलहवा में किराए का मकान लेकर नकली ढक्कन और बारकोड का भंडारण कर रखा था। यह सामग्री वह गुरुप्रसाद प्रजापति नामक व्यक्ति से ट्रांसपोर्ट के माध्यम से मंगाता था। इसके बाद इन्हें सिद्धार्थनगर, आसपास के जिलों और नेपाल सीमा से सटी शराब की दुकानों पर कार्यरत कुछ लोगों को बेच देता था। आरोपी के अनुसार, खाली शराब की बोतलों में दोबारा शराब भरकर उन पर नकली ढक्कन और फर्जी बारकोड लगाकर असली ब्रांड के नाम पर बाजार में बेचा जाता था। इस तरीके से गिरोह लंबे समय से अवैध कमाई कर रहा था।
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लाखों के राजस्व नुकसान की आशंका टली
- पुलिस का कहना है कि समय रहते कार्रवाई होने से बड़ी मात्रा में नकली और संभावित जहरीली शराब बाजार में पहुंचने से रोक दी गई। साथ ही सरकार को होने वाले लाखों रुपये के राजस्व नुकसान को भी बचाया गया है। मामले में गिरोह के अन्य सदस्यों गुरुप्रसाद प्रजापति उर्फ रामप्रताप प्रजापति निवासी सिद्धार्थनगर और बस्ती जिले के सोनहा थाने के मोहम्मदनगर असनहरा निवासी विजय जायसवाल की तलाश की जा रही है और विवेचना के दौरान नए नाम सामने आने पर कार्रवाई की जाएगी।
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दुकान सील, लाइसेंस निरस्तीकरण की प्रक्रिया
- आबकारी विभाग ने कार्रवाई के बाद संबंधित शराब की दुकान को सील कर दिया है। विभाग ने दुकान का लाइसेंस निरस्त करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ थाना बांसी में बीएनएस की विभिन्न धाराओं और आबकारी अधिनियम की धारा 60 और 64 के तहत प्राथमिकी दर्ज की है।
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पहले भी दर्ज है केस
- मुख्य आरोपी बलराम जायसवाल के खिलाफ वर्ष 2020 में भी धोखाधड़ी, जालसाजी और आबकारी अधिनियम के तहत मामला दर्ज हो चुका है। पुलिस अब उसके नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और नकली सामग्री की आपूर्ति करने वाले व्यक्तियों की भूमिका की भी जांच कर रही है।
टीम को मिला पुरस्कार
- इस कार्रवाई का नेतृत्व प्रभारी निरीक्षक मृत्युंजय पाठक, एसओजी प्रभारी उपनिरीक्षक चंद्रकांत पांडेय, सर्विलांस प्रभारी हरेंद्र चौहान और आबकारी विभाग के अधिकारियों ने किया। उत्कृष्ट कार्रवाई पर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने संयुक्त टीम को 20 हजार रुपये के नकद पुरस्कार से सम्मानित करने की घोषणा की।