सिद्धार्थनगर। देवोत्थान एकादशी पर एक नवंबर को घर-घर भगवान विष्णु की आराधना होगी। गन्ने के मंडप सजाए जाएंगे। भगवान विष्णु की पूजा की जाएगी। चातुर्मास का समापन होगा। मांगलिक कार्यक्रम शुरू हो जाएंगे और शहनाइयां गूंज उठेंगी।
मान्यता है कि देवशयनी एकादशी पर भगवान विष्णु क्षीर सागर में योग निद्रा के लिए चले जाते हैं। उनका जागरण देवउठनी एकादशी पर होता है। मांगलिक कार्यक्रम शुरू हो जाते हैं। आचार्य अच्युत रामानुजाचार्य ने बताया कि देवोत्थान एकादशी एक नवंबर शनिवार को मनाई जाएगी। एक नवंबर को देवउठनी एकादशी के अबूझ मुहूर्त तिथि होने पर लोग विवाह कार्य भी करेंगे।
उनके अनुसार नवंबर और दिसंबर में विवाह लग्न की तिथियां है। 16 दिसंबर से खरमास शुरू हो जाएंगे। विवाह कार्य थम जाएंगे। आचार्य ने बताया कि देवोत्थान एकादशी पर तुलसी शालिग्राम के विवाह उत्सव होंगे।