- श्रीमद्भागवत कथा के आठवें दिन कथावाचक ने सुनाया कृष्ण-सुदामा मिलन का प्रसंग, सच्ची मित्रता का दिया संदेश
डुमरियागंज। मित्रता का असली अर्थ सुख में साथ चलना नहीं बल्कि दुख के समय साथ खड़े रहना है। सच्चा मित्र वही है, जो विपरीत परिस्थितियों में भी अपने मित्र का साथ न छोड़े।
यह संदेश रविवार को डुमरियागंज तहसील क्षेत्र के बनगाई गांव में चल रही संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा के आठवें दिन कथावाचक डॉ. बृजेश शुक्ला जी महाराज ने सुदामा चरित्र का वर्णन करते हुए दिया। उन्होंने कहा कि सुदामा गरीबी से जूझ रहे थे। पत्नी के आग्रह पर वह अपने बाल सखा भगवान श्रीकृष्ण से मिलने द्वारका पहुंचे। मित्र को देखते ही भगवान कृष्ण नंगे पांव दौड़ पड़े और उन्हें गले लगा लिया। इसके बाद सिंहासन पर बैठाकर उनका आदर-सत्कार किया।
महाराज ने कहा कि भगवान कृष्ण ने सुदामा की पोटली से लाए तीन मुट्ठी चावल बड़े प्रेम से खाए और उन्हें त्रिलोक की संपदा प्रदान की। इस प्रसंग से सीख मिलती है कि भगवान व्यक्ति का धन नहीं, बल्कि उसका भाव देखते हैं। आज के समय में लोगों को कृष्ण जैसी मित्रता और सुदामा जैसा संतोष अपनाना चाहिए। कथा के दौरान पंडाल में जय श्रीकृष्ण के जयकारे गूंजते रहे।
इस अवसर पर यजमान रामप्यारे उपाध्याय, अभिषेक, अखिलेश, शिवांश, विनय, सुनील और प्रेम सहित सैकड़ों महिला-पुरुष श्रद्धालु मौजूद रहे।