- नवरात्र में दर्शन-पूजन और कढ़ाई चढ़ाने के लिए उमड़ रही भीड़
- मनौती पूरी होने पर श्रद्धालु चढ़ाते हैं कढ़ाई, सड़क और धर्मशाला की दरकार
तुलसियापुर। बानगंगा नदी का किनारा, प्राचीन मंदिर और आस्था की अटूट डोर। शोहरतगढ़ ब्लॉक के परसोहिया नानकार ग्राम पंचायत के कोमर टोले में स्थित सती मैया के दरबार में शारदीय नवरात्र के दौरान श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। आसपास के दर्जनों गांवों के अलावा नेपाल से भी भक्त माता के दर्शन-पूजन के लिए पहुंच रहे हैं। मान्यता है कि सती मैया के दरबार में सच्चे मन से मांगी गई मुराद पूरी होती है। यही विश्वास श्रद्धालुओं को यहां खींच लाता है।
बानगंगा चौराहे से दक्षिण करीब डेढ़ किलोमीटर दूर नदी के किनारे स्थित सती मैया का मंदिर काफी पुराना है। नवरात्र में यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचकर पूजन-अर्चन करते हैं और मनौती पूरी होने पर कढ़ाई चढ़ाते हैं। रोजाना सैकड़ों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। नवरात्र के अलावा पूरे वर्ष यहां मुंडन और यज्ञोपवीत संस्कार भी कराए जाते हैं। इससे मंदिर परिसर में साल भर धार्मिक गतिविधियां चलती रहती हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार, जब क्षेत्र में बारिश नहीं होती है तो आसपास के गांवों की महिलाएं ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से सती मैया के दरबार में पहुंचती हैं और अच्छी बारिश के लिए मनौती मांगती हैं। मनोकामना पूरी होने पर श्रद्धालु मंदिर में कढ़ाई चढ़ाते हैं। मंदिर परिसर में सती मैया के मुख्य मंदिर के अलावा हनुमान जी का मंदिर, समय माता का स्थान और भगवान शंकर की प्राचीन मूर्ति भी स्थापित है। यहां लगभग साल में एक बार यज्ञ का आयोजन भी होता है।
सड़क और धर्मशाला की दरकार
मंदिर में दर्शन करने पहुंचे रामू यादव, जयराम, मनोज गौतम, रामकिशोर भारती, रमेश यादव, दुर्गेश चौहान और चंद्रकेश भारती ने बताया कि सती मैया के प्रति लोगों की गहरी आस्था है। नवरात्र में दूर-दराज और नेपाल से भी श्रद्धालु आते हैं लेकिन मंदिर तक पहुंचने के लिए पक्की सड़क नहीं होने से उन्हें परेशानी होती है। श्रद्धालुओं ने मंदिर परिसर में धर्मशाला बनवाने की जरूरत भी बताई ताकि दूर से आने वाले भक्तों को ठहरने की सुविधा मिल सके।