सिद्धार्थनगर। माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज में आपात स्थिति में हृदय रोगियों की जान बचाने के लिए इमरजेंसी, मेडिसिन, सर्जरी और एनेस्थीसिया विभाग के डॉक्टर भी सीपीआर (कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन) दे सकेंगे। इसके लिए उन्हें विशेष कार्यशाला आयोजित कर प्रशिक्षण दिया गया।
प्रशिक्षण पूरा करने के बाद अब कॉलेज के चिकित्सक भी आपात स्थिति में मरीज की पहचान कर तुरंत सीपीआर देंगे, जिससे उसकी जान बचाई जा सके। इमरजेंसी में यह डॉक्टर हमेशा मौजूद रहेंगे, जिससे बेड खाली न होने या अन्य आपात स्थिति में इस प्रकार के मरीजों की जान बचाई जा सके।
बदलते वक्त, भागदौड़ भरी जिंदगी में दिल के रोगियों की संख्या में तेजी से वृद्धि हो रही है। कब कहां और किसको अटैक आ जाए, इसके बारे में किसी को नहीं पता। इसमें अटैक पड़ने के बाद अचेत पड़े व्यक्ति को तत्काल मूवमेंट में लाने के लिए सीपीआर की विधि अपनाई जाती है।
इसी विधि का प्रयोग करके बिना किसी दवा और इंजेक्शन के मरीज को होश में लाया जा सकता है। इसके बाद उसका दवा-इलाज शुरु होता है। इसी विधि में हर चिकित्सक पारंगत हो और देखते ही मरीज को पकड़ ले कि अटैक है। इसके लिए माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज में कार्यशाला का आयोजन करके इमरजेंसी, मेडिसिन, सर्जरी और एनेस्थीसिया विभाग के डॉक्टरों को विशेषज्ञ टीम ने एक-एक चरण में प्रशिक्षित किया।
बताया गया कि अचानक हृदय गति रुकने पर या सांस रुक जाने की स्थिति में मरीज को ‘सीपीआर’ देना सबसे पहला और अहम कदम होता है। यदि इसे सही समय पर और सही तरीके से दिया जाए तो मरीज की जान बचाई जा सकती है।
अब तक इमरजेंसी वार्ड में इस प्रक्रिया में समय लग जाता था, लेकिन प्रशिक्षित डॉक्टरों के होने से यह समस्या समाप्त हो जाएगी। इमरजेंसी में आने वाले हार्ट पेशेंट्स को तुरंत पहचान कर डॉक्टर सीपीआर प्रक्रिया शुरू कर देंगे। इससे इमरजेंसी में आने वाले हार्ट अटैक के शिकार रोगियों के इलाज में काफी राहत मिलेगी। ं