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Siddharthnagar News: केस 14 दुकानदारों पर, ऊपर तक पहुंचेगी जांच की आंच

Sat, 16 Aug 2025 11:24 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
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सिद्धार्थनगर। जिले में खाद की किल्लत और कालाबाजारी के मामले लगातार उजागर हो रहे हैं। इसमें अबतक 14 दुकानदारों पर केस दर्ज कराया गया है, जबकि एक आरोपी जेल भेजा जा चुका है। इसकी सही तरह से जांच की जाए तो कई विभागीय लोग भी इसकी जद में आ सकते हैं।
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कालाबाजारी के इस खेल में दुकानदार ही नहीं, स्टाॅक आवंटन, फीडिंग और रजिस्टर की जांच में बड़ी गड़बड़ी मिली है। ऐसा इसलिए कि दुकान की जांच नियमित स्टाॅक और वितरण की रिपोर्ट विभागीय जिम्मेदारों को निरीक्षक होता है।
ऐसे में वितरण और रजिस्टर और अवैध भंडारण का खेल कैसे हुआ, यह बात सामने आ जाएगी। पुलिस की जांच में अगर दुकानदारों ने मुंह खोला तो कई लोग जद में आ सकते हैं। फिलहाल पहली बार ऐसा है कि एक सीजन में इतने केस दर्ज हुए हैं।
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सामने आया अनियमितता का सच : धान की रोपाई के बीच खाद की मांग बढ़ी तो किसान परेशान हो उठे, समितियों पर लंबी कतार लगने लगी, इसके बाद भी किसानों को यूरिया व डीएपी नहीं मिल पा रहा था। जब किसानों में हाहाकर मचा और किल्लत होने लगी तो जिलाधिकारी डॉ. राजा गणपति आर खुद मैदान में उतर गए। धड़ाधड़ निजी दुकानों की चेकिंग शुरु की तो सारे नियम और कायदे हवा में मिले। स्टाॅक रजिस्टर में कुछ और मौके पर कुछ और कागजों में असमानता पाई गई। रजिस्टर और मशीन के कार्य में अंतर सहित कई खामियां उजागर हुई। इसके बाद एक-एक करके 12 निजी दुकानदारों पर आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत केस दर्ज करवाया गया। इसमें एक आरोपी दुकानदार जेल भी गया। जबकि, दो केस पहले ही दर्ज हुए थे। इस मामले में बाॅर्डर पर नेपाल में तस्करी के लिए स्टॉक रखा गया था। केस दर्ज करने के बाद पुलिस ने जांच शुरु कर दी है। इस जांच में कई कागजात पकड़ में आएगा और कागजात पर इंट्री करने वाले भी जांच की जद में आएंगे।
हर बोरी का दर्ज होना है ऑनलाइन रिकॉर्ड: खाद की कालाबाजारी न होने पाए इसे रोकने के लिए वितरण में डिजिटल व्यवस्था लागू की गई है। इसमें रजिस्टर में इंट्री के साथ ऑनलाइन भी अपडेट करना है। लेकिन, जब दुकानों की जांच की गई तो खाद के मौजूद स्टॉक और अभिलेख में अंतर पाया गया। सूत्रों की मानें तो दो प्रकार के रजिस्टर रखे जाते हैं, जिसमें इंट्री की जाती है। एक रजिस्टर सरकारी विभाग को दिखाने के लिए रखा जाता है। जबकि, दूसरे से काम किया जाता है। वहीं, विभाग से जुड़े लोगों की मानें तो आवंटन से लेकर वितरण तक में नियमित जांच होती है। स्टाॅक में बिक्री और मौजूदा देखा जाता है, बाकायदा उसे नोट किया जाता है। अगर इतना हो रहा था तो अनियमितता कैसी हो रही थी। अगर नहीं किया जा रहा था तो कहीं न कहीं विभागीय के लोग की जानकारी में चल रहा था। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि गड़बड़ी करनने में पूरा सहयोग प्राप्त है। फिलहाल पुलिस की जांच में सबकुछ सामने आ जाएगा। क्योंकि, केस दर्ज हुआ है तो पुलिस कागजात टटोलेगी और टटोला जाएगा तो जांच की जद में और लोग आएंगे न की सिर्फ
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