सिद्धार्थनगर। भगवान बुद्ध के पदचिह्न सदियों से ध्यान और ज्ञान का प्रतीक रहे हैं। बौद्ध सर्किट पर पहचान मिलने के बाद सिद्धार्थनगर अब वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर अपनी पहचान बनाने की दौड़ में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
जिले के पिपरहवा स्तूप, कपिलवस्तु हेरिटेज जोन और योगमाया मंदिर न सिर्फ श्रद्धालुओं बल्कि अंतरराष्ट्रीय शोधकर्ताओं और पर्यटकों का आकर्षण बन गए हैं। 2025 में बौद्ध सर्किट में 61 लाख पर्यटक आए, जिनमें 16 हजार अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों ने सिद्धार्थनगर का रुख किया है।
इससे साफ है कि अब जिला सिर्फ इतिहास और विरासत का केंद्र ही नहीं बल्कि वैश्विक पर्यटन के लिए तैयार हॉटस्पॉट बन चुका है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब दिल्ली में पिपरहवा अवशेष प्रदर्शनी के उद्घाटन समारोह में जब से बुद्ध सर्किट को वैश्विक पर्यटन और कनेक्टिविटी बढ़ाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की, तबसे हवा का रुख भांपने वाले कहते हैं कि कब से विकास की अंगड़ाई ले रहा सिद्धार्थनगर अब पूरी रफ्तार में दौड़ेगा। बर्डपुर से पिपरहवा (कपिलवस्तु) तक नार्थ-साउथ कॉरिडोर, कपिलवस्तु स्तूप पर साउंड एंड लाइट शो, बुद्ध थीम पार्क और अन्य सुविधाओं के साथ अंतरराष्ट्रीय मंदिर/मठ निर्माण के साथ रेल कनेक्टिविटी विकास को रफ्तार देने के लिए तैयार हैं।
ग्लोबल पर्यटन का नया केंद्र बनता देख इतिहासकार ही नहीं जिले के 35 लाख नागरिक फूले नहीं समा रहे हैं। रोड-एयर कनेक्टिविटी में सुधार ने जिले की ग्लोबल ब्रांड बनने की रफ्तार और तेज कर दी है।