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बुद्ध धरा पर बुद्ध की बात : जन्म स्थान से त्याग, तपस्या और करुणा का दिया संदेश

Wed, 28 Jan 2026 11:16 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
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सिद्धार्थनगर। भगवान बुद्ध की जन्मस्थली से लेकर ज्ञान, उपदेश और निर्वाण स्थलों तक फैले उनके जीवन दर्शन को जोड़ते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि कपिलवस्तु, सारनाथ और श्रावस्ती केवल ऐतिहासिक स्थल नहीं बल्कि मानवता को दिशा देने वाले आध्यात्मिक केंद्र है।
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सिद्धार्थनगर महोत्सव के उद्घाटन समारोह में मुख्यमंत्री ने भगवान बुद्ध के जीवन, उनके त्याग और “बुद्धं शरणं गच्छामि” के महत्व को रेखांकित करते हुए मनुष्य के कर्तव्य और करुणा के भाव पर विस्तार से प्रकाश डाला।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कपिलवस्तु वह भूमि है, जहां से राजकुमार सिद्धार्थ ने सांसारिक वैभव को त्याग कर सत्य की खोज का मार्ग चुना। यही त्याग आगे चलकर पूरी दुनिया के लिए शांति और अहिंसा का संदेश बना। उन्होंने कहा कि सारनाथ वह स्थल है, जहां बुद्ध ने पहला उपदेश देकर मानव समाज को मध्यम मार्ग का दर्शन कराया जबकि श्रावस्ती में रहकर उन्होंने करुणा, सेवा और सहअस्तित्व की शिक्षा दी।
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आगे कहा कि यह भूमि केवल भौगोलिक पहचान नहीं है बल्कि विश्व को करुणा, मैत्री, अहिंसा और मानव गरिमा का संदेश देने वाली भूमि है।
सीएम ने कहा कि “बुद्धं शरणं गच्छामि” केवल एक वाक्य नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाला सूत्र है। इसका अर्थ है सत्य, अहिंसा, करुणा और विवेक के मार्ग को अपनाना। आज के दौर में जब समाज तनाव, हिंसा और भटकाव से जूझ रहा है, तब बुद्ध का संदेश पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हो गया है। मुख्यमंत्री ने सिद्धार्थनगर की ऐतिहासिक और आध्यात्मिक विरासत पर गर्व जताते हुए कहा कि यह भूमि विश्व को शांति का मार्ग दिखाने वाली रही है।
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