इटवा के रमवापुर पाठक गांव में रोते बिलखते मृतक के परिजन। संवाद
इटवा। आर्थिक तंगी इंसान को तोड़ देती है और टूटने पर तोड़े तो इससे बड़ा कष्ट और कुछ नहीं हो सकता है। कुछ ऐसा ही हुआ एक पिता के साथ हुआ। बेटे की ट्रेन से गिरकर मौत हो गई। उस दुख के पहाड़ से बड़ा उसके सामने लाश को लाने के लिए आर्थिक तंगी की दीवार खड़ी हो गई।
गोल्हौरा थाना क्षेत्र के रमवापुर पाठक गांव के रहने वाले रमवापुर पाठक निवासी अनिल बेटे सुनील (35) की मौत के अपार कष्ट से जूझ रहे मजबूर और बेबस पिता को आर्थिक तंगी ने तब और तोड़ दिया जब लाश लाने के लिए उसके हाथ खाली थे। बेटे को अंतिम बार देखे लेने की इच्छा में उसने गांव के लोगों ने आर्थिक मदद मांगी। लोगों ने हाथ बढ़ाया और 23 हजार रुपये दिए, इसके बाद झांसी पोस्टमार्टम हाउस से किराये के वाहन से शहर लेकर गांव पहुंचा, जिसके बाद पिता ने कांपते हाथों से बेटे का अंतिम संस्कार किया।
गोल्हौरा थाना के रमवापुर पाठक निवासी सुनील (35) पुत्र अनिल रोजी रोटी के लिए तीन माह पूर्व मुंबई गया था। वहां उसकी तबीयत खराब हो गई। इसके चलते घरवालों के कहने पर वह वापसी के लिए मुंबई से ट्रेन पर बैठ गया। शुक्रवार को वह झांसी पहुंचा ही था कि ट्रेन से नीचे गिर गया, जिससे उसकी मौत हो गई। इसकी सूचना जब गांव में पहुंची तो गांव में मातम छा गया। हर कोई सुनील की मौत से दुखी था। गांव के पड़ोसी आनंद कुमार दुबे बताते है कि तीन बच्चों का पिता सुनील घर में अकेले कमाऊ पूत था। उसी के मेहनत मजदूरी से उसके घर का खर्च चलता था। यही कारण था कि वर्तमान समय में उसके पास एक अदद मोबाइल नहीं था, जिसके चलते ट्रेन पर बैठने की सूचना उसे दूसरे के मोबाइल से देनी पड़ी। लेकिन, दूसरे की वहीं मोबाइल झांसी जिले के थाना पुंछ के तहत पड़ने वाले खिल्ली गांव के पास ट्रेन से गिरने के चलते हुई मौत पर घरवालों को सूचना देने का सबसे बड़ा माध्यम भी बना।
बताया जाता है कि मृतक की पहचान न होने पर झांसी की पुलिस ने शव को लावारिस मानकर मोर्चरी में रखवा दिया था। बाद में मोबाइल से जब जानकारी गांव पहुंची तो पिता अनिल का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण शव लाने में धनाभाव सबसे बड़ी बाधा बन गया। लेकिन, गांव वालों को जब इसकी जानकारी हुई तो उन लोगो ने शव गांव में लाने के लिए मृतक के पिता के हाथ में 23 हजार रुपये जुटाकर रख दिए। इसी रकम से पिता अनिल कुछ लोगों के साथ झांसी पहुंचे। रविवार को पोस्टमॉर्टम के बाद जब उन्होंने बेटे का शव देखा तो बेहोश होकर गिर पड़े। ग्रामीणों ने किसी तरह ढांढस बंधाया और लाश को लेकर अपने गांव पहुंचे। सोमवार को गांव में गमगीन माहौल में डुमरियागंज श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार किया गया।