सिद्धार्थनगर। शिया समुदाय ने शनिवार को अय्यामे अजा के अंतिम दिन और इमाम हसन के शहादत दिवस पर हल्लौर कस्बे में अलम, ताबूत, जुलजनाह और अमारी का अलविदाई जुलूस निकाला। नौहा और मातम के बीच पूरे कस्बे का माहौल गमगीन रहा। देर शाम कर्बला में ताजियों को सुपुर्द-ए-खाक कर अकीदतमंदों ने हजरत इमाम हुसैन और कर्बला के शहीदों को नम आंखों से अलविदा कहा।
मुहर्रम की चांद रात से शुरू हुए करीब दो माह आठ दिन के मरसिया, मजलिस और मातम के सिलसिले का शनिवार को समापन हुआ। सुबह सात बजे इलियास हुसैन के आवास से अंजुमन गुलदस्ता-ए-मातम की ओर से अलम और अमारी का जुलूस निकला जबकि इमामबाड़ा हुसैनिया अली हसन से ताबूत और जुलजनाह रवाना हुआ। जुलूस कस्बे के विभिन्न मोहल्लों से गुजरते हुए नौहा मातम के बीच देर शाम पश्चिम मोहल्ले स्थित कर्बला पहुंचा।
जुलूस में नायाब हल्लौरी, नफीस हल्लौरी, सावन, सज्जाद, हसन जमाल, कामयाब बबलू, आले रजा, हानी, अकील, फरहान, कायनात, अरमान, मुमताज, आरजू, खुशनूद, नौशाद, शानू और कमर समेत कई सोजख्वानों ने अलविदाई नौहे पेश किए। हल्लौर के अलावा बस्ती, गोरखपुर, लखनऊ, कानपुर, अयोध्या, उतरौला तथा आसपास के दर्जनों गांवों से आए सैकड़ों लोग जुलूस में शामिल हुए। श्रद्धालुओं के लिए जगह-जगह भोजन, शरबत और चाय-पानी की व्यवस्था भी की गई।
आज से शुरू होंगे जश्न और खुशियों के कार्यक्रम ः अय्यामे अजा के समापन के साथ ही रविवार से शिया समुदाय में जश्न-ए-ईद-ए-जहरा की शुरुआत होगी। करीब सवा दो माह तक गम के कारण टाले गए खुशियों के कार्यक्रम अब फिर से प्रारंभ होंगे। शिया परिवार पारंपरिक रूप से रंग-बिरंगे वस्त्र धारण कर जश्न में शिरकत करेंगे।