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Siddharthnagar News: वायरल संक्रमण का वार... डायरिया बना रहा गंभीर बीमार

Mon, 29 Sep 2025 11:10 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
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सिद्धार्थनगर। वायरल के वार के बीच डायरिया की दस्तक से मरीजों की परेशानी बढ़ गई है। जरा सी लापरवाही से जान पर बन आ रही है। लोटन ब्लॉक क्षेत्र के बस्तिया गांव के टोला अमहवा में बुखार और डायरिया की चपेट में आकर मां और बेटी की 24 घंटे के भीतर मौत हो गई।
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बीमारी की हकीकत जानने के लिए संवाद न्यूज एजेंसी की टीम ने माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज की ओपीडी और बच्चों के वार्ड की हकीकत जानी। यहां पीड़ितों की संख्या बढ़ी मिली।
चिकित्सकों ने बताया कि ओपीडी में आने वाले सात से आठ डायरिया से पीड़ित बच्चों को भर्ती करना पड़ रहा है। हर बीमार को कम से कम 24 घंटे भर्ती होने के बाद ही स्वस्थ हो पा रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ बीमारी को बहुत ही घातक बता रहे हैं, उनका कहना है कि जा सी लापरवाही से जान जा सकती है। अगर किसी को यह समस्या होती है तो बिना देर किए नजदीक के सरकारी अस्पताल में इलाज करवाएं। बीमारी के बढ़ने के पीछे मौसम का बेरुख होना और सितंबर माह में जून जैसे तापमान और गर्मी होना बताया जा रहा है। विशेषज्ञ खान-पान में विशेष सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं।
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ओपीडी के साथ वार्ड में भी बढ़े बुखार और डायरिया से पीड़ित बच्चे: बच्चों के बीमार पड़ने डायरिया और तेज बुखार के साथ झटका आने के मामले बढ़े हैं। माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज के एमसीएच विंग में संचालित बाल रोग विभाग में टीम हकीकत जानने के लिए पहुंची। दोपहर 12:30 बजे तक 128 मरीज देखे जा चुके थे। इसमें तेज बुखार के साथ झटका और कई बच्चों काे बुखार के साथ उल्टी और दस्त की शिकायती मिली।
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. नम्रता राव ने बताया कि बच्चे अधिक बीमार हो रहे हैं। इसमें तेज बुखार से झटका आ रहा है। कई बच्चे डायरिया की गिरफ्त में आ रहे हैं। अगर 150 से 200 मरीजों में 25 से 30 डायरियो से पीड़ित मिल रहे हैं। 5-7 ऐसे बच्चे आ रहे हैं, जिन्हें ओपीडी से ही वार्ड में भर्ती करने के लिए भेज दिया जा रहा है। 24 से 48 घंटे इलाज के बाद छोड़ा गया।
वहीं, डॉक्टरों ने मरीजों की हिस्ट्री लेते हुए यह भी पाया कि कुछ बच्चों को स्थानीय स्तर पर इलाज कराया गया। जब उनकी हालत बिगड़ तो मेडिकल कॉलेज में इलाज कराने के लिए पहुंच गए। दो डॉक्टरों की ओपीडी में प्रतिदिन 250-300 से अधिक बच्चे पहुंच रहे हैं। उसका निवासी रीमा और कोयडा निवासी सुनीता की समस्या एक जैसी थी। दोनों के बच्चों को बुखार के साथ उल्टी दस्त हो रहा था। तीन से चार दिन चौराहे के मेडिकल स्टोर से दवा लेकर खिलाई। राहत नहीं मिलने पर मेडिकल कॉलेज पहुंची। कमोबेश एक ही प्रकार की समस्या थी।
वहीं, ओपीडी की बात करें तो मेडिसिन भी विभाग में हर उम्र के लोग बुखार, जुकाम और डायरिया के शिकार पाए गए। मेडिसिन विभाग के विशेषज्ञ डाॅ. सीबी चौधरी ने बताया कि बुखार, जुकाम और बदन दर्द के रोगियों की संख्या ओपीडी में बढ़ी है। इसमें मौसम के असर से यह समस्या हो रही है। दवा के साथ बचाव और खानपान में नियंत्रण करने की सलाह दी जा रही है। ओपीडी के आंकड़ों पर गौर करें तो सोमवार को 1744 मरीज इलाज कराने के लिए पहुंचे थे।
छह दिन में आए 95 से अधिक बच्चे: माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज के पीआईसीयू वार्ड में बीमारोंं की जानकारी लेने के लिए पहुंचे। यहां 15 बेड के वार्ड में 12 बेड पर बच्चे भर्ती मिले। कुछ बच्चों को छुट्टी दी गई।
वहीं सुबह में दो बच्चे भर्ती किए गए, जिनमें बुखार की शिकायती थी। इस माह में मरीजों की संख्या बढ़ी है। 24 घंटे में 12-15 बच्चे आ रहे हैं। छह दिन में 95 से अधिक बच्चे भर्ती हुए हैं, जिनका इलाज चल रहा है। वार्ड में तैनात स्वास्थ्य कर्मियों ने बताया कि तेज बुखार के साथ झटके की शिकायत वाले मरीज आ रहे हैं। कई को बुखार के साथ उल्टी और दस्त की शिकायत हो रही है।
भर्ती करने के बाद 24 घंटे निगरानी में जांच कराने के साथ दवा दी जाती है। जब कंट्रोल हो जाता है तो एमसीएच विंग के वार्ड पीडियाट्रिक वार्ड में शिफ्ट कर दिया जाता है, जहां से एकदम स्वास्थ्य होने के बाद उन्हें दवा लिखकर छुट्टी दी जाती है।
डायरिया के बढ़े मरीज, करना पड़ रहा भर्ती: डुमरियागंज क्षेत्र के सीएचसी बेंवा में मरीज बढे़ हुए हैं। प्रतिदिन चार सौ से अधिक ओपीडी में करीब 70-80 मरीज बुखार के तो वहीं 30-40 मरीज डायरिया के पहुंच रहे हैं। यहां भी सीएचसी सिरसिया की तरह आईवी सेट और एमवीआई इंजेक्शन की कमी है, जिससे मरीजों को बाहर से खरीद कर लाना पड़ता है।
अधीक्षक सीएचसी बेवां डॉ. विकास चौधरी ने बताया कि डायरिया होने पर मरीज को ओआरएस का घोल पिलाते रहना चाहिए। अगर मौके पर ओआरएस उपलब्ध नहीं है तो नींबू, नमक, चीनी का घोल बनाकर पिलाएं, जिससे डिहाइड्रेशन से बचा जा सकता है।
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