खुनुवां। भारत-नेपाल सीमा के खुनुवां कस्बे से रोडवेज बस सेवा नहीं है। इस कारण सीमावर्ती स्थानीय लोगों के साथ ही नेपाल से आने वाले यात्रियों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जिला मुख्यालय तक पहुंचने के लिए लोगों को निजी वाहनों पर निर्भर रहना पड़ता है। लोगों का कहना है कि अगर बस चलती तो गोरखपुर जाने में भी सहूलियत मिलेगी।
सरकारी बस सेवा के अभाव में खुनुवां से शोहरतगढ़ की नौ किलोमीटर की दूरी तय करने के लिए यात्रियों को ई-रिक्शा, टेंपो और निजी वाहनों का सहारा लेना पड़ता है। इसके लिए उन्हें प्रति सवारी करीब 30 रुपये किराया देना पड़ता है। वहीं, जिला मुख्यालय सिद्धार्थनगर तक पहुंचने में आधा दिन और गोरखपुर जाने में पूरा दिन लग जाता है।
लोगों का कहना है कि बड़े शहरों में पढ़ाई, इलाज और रिश्तेदारी के लिए यात्रा करना आम जरूरत है, लेकिन सरकारी संसाधनों की सुविधा न होने से यह यात्रा बेहद कठिन हो गई है। वर्ष 2012 में खुनुवां से गोरखपुर के लिए रोडवेज बस सेवा शुरू हुई थी, लेकिन शोहरतगढ़ में बस कंडक्टर के साथ मारपीट की घटना के बाद सेवा बंद कर दी गई। तब से आज तक बसें दोबारा नहीं चली।
प्रधान संघ जिलाध्यक्ष डॉ. पवन कुमार मिश्रा ने कहा कि मुख्यालय स्थापना के बाद अंतरराष्ट्रीय महत्व के इस मार्ग पर विभागीय जिम्मेदारों का ध्यान नहीं जा रहा है। सीमावर्ती गांवों के लोगों में बस सेवा न होने को लेकर गहरी नाराजगी है। खुनुवां के रामानंद गिरी, श्यामलाल यादव, बाल गोविंद पटेल, मोहित पाल, दिनेश कुमार गुप्ता, व्यापार संगठन अध्यक्ष रवींद्र कुमार गुप्ता आदि ने शासन-प्रशासन से रोडवेज बस सेवा तत्काल बहाल करने की मांग की है।
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