सिद्धार्थनगर। सरकार ने आउटसोर्स कर्मचारियों का मानदेय बढ़ाने और सुविधाएं देने की घोषणा की थी। जिले के करीब 3,500 कर्मचारियों को दिवाली से पहले लाभ मिलने की उम्मीद थी। सितंबर बीतने के बाद भी विभागों में इस दिशा में प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी है।
विभागीय अधिकारी शासन से स्पष्ट दिशा-निर्देश मिलने का इंतजार कर रहे हैं। ऐसे में घोषणा और उसके क्रियान्वयन के बीच अंतर से कर्मचारियों में निराशा है।
सरकार की प्रस्तावित व्यवस्था के तहत आउटसोर्स कर्मचारियों को उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम (यूपीसीओएस) के माध्यम से कई सुविधाएं मिलनी हैं। इनमें हर माह पांच तारीख तक मानदेय भुगतान, ईपीएफ, ईएसआई, मेडिक्लेम और दुर्घटना बीमा जैसी सामाजिक सुरक्षा सुविधाएं शामिल हैं। एजेंसी बदलने की स्थिति में पुराने कर्मचारियों की सेवा निरंतरता बनाए रखने का भी प्रावधान बताया गया है।
जिले के 11 नगर निकायों में करीब 1,500 आउटसोर्स कर्मचारी कार्यरत हैं। माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज में करीब 799, बेसिक शिक्षा विभाग में 231 और स्वास्थ्य विभाग में 147 कर्मचारी सेवाएं दे रहे हैं।
सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु में करीब 100 आउटसोर्स कर्मचारी कार्यरत हैं। बिजली निगम, वन विभाग और विकास विभाग समेत अन्य विभागों में भी आउटसोर्स कर्मचारी सेवाएं दे रहे हैं।
मानदेय भुगतान और सामाजिक सुरक्षा ःयूपीसीओएस व्यवस्था में हर माह की पांच तारीख तक आउटसोर्स कर्मचारियों को मानदेय भुगतान का प्रावधान बताया गया है। ईपीएफ, ईएसआई, मेडिक्लेम और दुर्घटना बीमा जैसी सामाजिक सुरक्षा सुविधाओं को भी इससे जोड़ा जाना है।
आउटसोर्स कर्मचारी राकेश ने बताया कि नई व्यवस्था लागू होने की उम्मीद है। इसका वास्तविक लाभ तभी मिलेगा, जब एजेंसियां समय पर मानदेय और सामाजिक सुरक्षा संबंधी सुविधाएं दें।