सिद्धार्थनगर। डीएपी की एक-एक बोरी के लिए किसानों को परेशान होना पड़ा। भोर से शाम तक समितियों पर टिके रहने के बाद भी खाद नहीं मिलने पर निजी दुकानों पर महंगी दर पर खाद खरीदने को विवश हुए। सिंचाई के बाद यूरिया के लिए भटकना पड़ेगा। वह भी मिल जाए, इस बात की कोई गारंटी नहीं है। क्योंकि बार्डर पर यूरिया की तस्करी बढ़ गई है। जिले में मांग शुरू होने से पहले ही तस्कर डीएपी की तरह से यूरिया भी बॉर्डर पार पहुंचा दे रहे हैं।
यह सब सीमावर्ती क्षेत्र की खाद दुकानदारों और तस्करों की सेटिंग से हो रहा है। पड़ताल में सीमावर्ती क्षेत्र में तेजी से बढ़ रही खाद तस्करी की हकीकत निकलकर आई। क्षेत्र के किसानों ने बताया कि सीमावर्ती क्षेत्र में उर्वरक की दुकान और गोदाम अलग-अलग बने हैं। तस्करों की सेटिंग दुकानदार से है, दुकान पर रुपये जमा होता है और बाद में गोदाम से खाद दी जाती है।
भोर और शाम के समय साइकिल, बाइक और रात में पिकअप से बार्डर पार कर देते हैं। 266 रुपये की यूरिया निजी दुकान वाले 400 रुपये तक दे रहे हैं। वही खाद बार्डर पार पहुंचने के बाद 800-1000 रुपये प्रति बोरी की दर से बेची जा रही है। 600 रुपये में कैरियर और तस्कर सबका हिस्सा बंटा हुआ है।
दो दिन पहले कोटिया से एसएसबी और ढेबरुआ क्षेत्र के पुलिस ने कुल 58 बोरी यूरिया के साथ छह लोगों को पकड़ा। इसमें पांच नेपाली और एक भारतीय पिकअप चालक है जो पिकअप से यूरिया लेकर जाते समय एसएसबी के हाथ लगा था।
कार्रवाई इस बात को बल दे रहा है कि तस्करों ने डीएपी के बाद यूरिया की तस्करी शुरू कर दी है। अगर तस्करी रुकी नहीं तो किसान संकट झेलेंगे। बार्डर पर तस्करी के संबंध में संबंधित जिम्मेदारों ने कोई भी जवाब देने से मना कर दिया।
बार्डर पर काम नहीं करती ई-पॉश मशीन : सीमावर्ती क्षेत्र में खाद की तस्करी नहीं रुकने के पीछे से सबसे बड़ी समस्या यह है कि यहां ई-पॉश मशीन काम नहीं करता है। उसकी आड़ में बड़े किसानों के नाम पर एक साथ कई बोरी खाद रजिस्टर में दर्ज कर देते हैं।
इसके बाद वह खाद तस्करों के हाथ बेच देते हैं। रजिस्टर की चेकिंग में रिपोर्ट भी सही रहता है और काम भी हो जाता है। इसमें छोटे किसानों की उपयोग नहीं करते हैं। क्योंकि रकबे की जांच में पकड़े जा सकते हैं। इसलिए क्षेत्र के बड़े किसानों की आड़ में खाद खपा लेते हैं। अगर मशीन काम करता तो रिकार्ड ऑनलाइन दिखता।
आवंटित होती है इतनी खाद : आंकड़ाें के मुताबिक जिले में लगभग डेढ़ लाख हेक्टेयर भूमि पर गेहूं की खेती होती है। आंकड़ों के मुताबिक इतने रकबे के लिए 10687 मीट्रिक टन डीएपी, 6211 मीट्रिक टन एनपीके, एमओपी 1381 मीट्रिक, सुपर फास्फेट 20899 मीट्रिक टन। जबकि, यूरिया 47 हजार मीट्रिक टन लक्ष्य है। इसमें 27 हजार एमटी, निजी दुकानों और समितियों को आवंटित किया जा चुका है।
दो दिन पहले पकड़ी गई खाद : दो दिन पहले एसएसबी कोटिया की टीम ने सीमावर्ती क्षेत्र में चेकिंग के दौरान एक पिकअप पकड़ा। पिकअप से 50 बोरी यूरिया बरामद हुआ। पूछताछ में चालक यूरिया के बारे में जानकारी नहीं दे सका। इसके बाद लिखापढ़ी करके बढ़नी कस्टम को सुपुर्द कर दिया गया।
इसी प्रकार ढेबरुआ पुलिस की टीम ने सीमा पर गश्त के दौरान पांच साइकिल सवारों को आठ बोरी यूरिया के साथ पकड़ा। पकड़े गए सभी आरोपी नेपाल के थे। पूछताछ करने के बाद बढ़नी कस्टम को सुपुर्द कर दिया गया।