किसानों की समस्याओं का समाधान न होने और दुर्व्यवस्था के विरोध में सोमवार को भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) ने एसबीआई की मदनपुर शाखा पर धरना दिया। घंटों इंतजार के बाद भी किसी जिम्मेदार अधिकारी के ज्ञापन लेने उपस्थित न होने पर शाखा परिसर पर ताला जड़ दिया। करीब एक घंटे तक तालाबंदी के चलते बैंक कर्मचारी व ग्राहक शाखा परिसर में ही बंद रहे। इससे काम-काज भी प्रभावित रहा। एसडीएम के आश्वासन पर किसान शांत हुए और ताला खोला।
धरने पर बैठे यूनियन के सदस्यों ने कहा कि मदनपुर शाखा के प्रबंधक का किसानों के साथ बर्ताव मर्यादित नहीं है। पेंशन धारक बुजुर्गों से पेंशन निकासी के बदले धन उगाही की जा रही है। प्रदर्शनकारियों ने वर्ष 2013 से अब तक बने क्रेडिट कार्ड धारक किसानों के खाते से बीमा के लिए प्रीमियम की धनराशि बैंक ने काट ली है, लेकिन उसका विवरण नहीं दिया जा रहा।
फसल बीमा के लाभ से भी किसान वंचित हैं। बार-बार पूछने के बाद भी इस बारे में कोई सूचना बैंक अधिकारी नहीं दे रहे, इससे वित्तीय अनियमितता स्पष्ट हो रही है। प्रदर्शनकारियों ने बैंक में नियुक्त कर्मचारी पर मधवापुर निवासी दीनानाथ उपाध्याय के साथ दुर्व्यवहार मामले में संबंधित कर्मचारी पर कार्रवाई की मांग की। छह सूत्रीय मांगों को लेकर सुबह से धरने पर बैठे किसान ज्ञापन लेने के लिए बैंक के उच्चाधिकारियों को बुलाते रहे।
अपराह्न साढ़े तीन बजे तक भी सक्षम अधिकारी नहीं पहुंचे तो किसानों ने शाखा परिसर पर ताला जड़ दिया। आरोप लगाया कि उच्चाधिकारी भी मामले में लीपापोती में लगे हुए हैं। उनके संरक्षण के कारण ही किसानों का उत्पीड़न हो रहा है। इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
सक्षम अधिकारियों के पहुंचने तक आंदोलन जारी रहेगा। तालाबंदी की सूचना के बाद अपराह्न साढ़े 4 बजे एसडीएम सदर राजितराम प्रजापति मौके पर पहुंचे। प्रदर्शनकारियों से वार्ता करते हुए शाखा प्रबंधक को भी मौके पर बुलाया।
वार्ता के दौरान शाखा प्रबंधक ने खेद प्रकट करते हुए किसानों को आश्वस्त किया कि सभी समस्याओं का समुचित समाधान कर दिया जाएगा। प्रदर्शन व तालाबंदी में बस्ती मंडल अध्यक्ष पटेश्वरी चौधरी, जिलाध्यक्ष इश्तियाक अहमद, राकेश नारायण त्रिपाठी, इंद्रजीत दुबे, कपिलदेव मणि त्रिपाठी, मुरलीधर लोधी, राकेश श्रीवास्तव, राजेश दुबे, अमरावती देवी, रितुरा देवी आदि शामिल रहे।
एसबीआई के जिला अग्रणी बैंक प्रबंधक आरके सिंह ने बताया कि फसल बीमा के लिए प्रीमियम बैंक लेता है, लेकिन बीमा देने के लिए अधिकृत नहीं है। इसके लिए इफको-टोकियो संस्था जिम्मेदार है। किसानों की अन्य जो भी समस्याएं हैं, उनकी जांच कर कार्रवाई की जाएगी।