फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Independence Day: शहीद वीरेंद्र की बहादुरी से गौरवान्वित होते हैं गांव के लोग, अब बेटा कर रहा देश की सेवा

Mon, 15 Aug 2022 10:28 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर।

सार

 कभी देश के लिए खुद सेवा कर चुके बुजुर्ग हंस नाथ त्रिपाठी कहते हैं कि बेटे की शहादत की खबर सुनकर पूरा परिवार स्तब्ध रह गया था लेकिन फिर हिम्मत और साहस से इस परिस्थिति का सामना कर पोती को भी देश की सेवा के लिए भेज दिया।
विज्ञापन
शहीद..............बृजेंद्र मणि त्रिपाठी। - फोटो : SIDDHARTHNAGAR
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

सिद्धार्थनगर जिले नौजवानों में देश की सुरक्षा पर कुर्बानी देने का जज्बा कम नहीं है। लोटन क्षेत्र के भेलौजी गांव निवासी ऐसे ही एक वीर जवान के 23 वर्ष पूर्व दिए शहादत से परिजन, गांव और क्षेत्र के लोग आज भी गौरवान्वित महसूस करते हैं। वहीं, गांव में मूलभूत सुविधाओं की कमी की वजह से गांव के लोगों में नाराजगी है।

विज्ञापन


भेलौजी गांव निवासी हंसनाथ त्रिपाठी सीआरपीएफ में थे, लेकिन घरेलू जिम्मेदारियों की वजह से 1987 में वीआरएस लेकर घर आ गए। उन्होंने इसी वर्ष अपने चार पुत्रों में सबसे बड़े पुत्र वीरेंद्र मणि त्रिपाठी को देश की सेवा के लिए सीआरपीएफ में भेज दिया।

वीरेंद्र मणि त्रिपाठी 44 वर्ष की उम्र में 19 फरवरी 1999 में मणिपुर के चिल्ली आमघाट नामक जगह पर नक्सलियों द्वारा किए गए हमले में शहीद हो गए थे। शहीद वीरेंद्र मणि का पार्थिव शरीर जब गांव आया तो परिवार समेत गांव व क्षेत्र के लोगों में गर्व महसूस किया।
विज्ञापन


शहीद वीरेंद्र मणि त्रिपाठी के छोटे भाई अनिल मणि त्रिपाठी वीरेंद्र मणि की शहादत के बारे में बताते हुए कहते हैं कि मणिपुर के उनके भाई सूबेदार के पोस्ट पर सीआरपीएफ में ड्यूटी पर थे। 19 फरवरी को शाम पांच बजे जब वह अपने पांच अन्य साथियों के साथ चिल्ली आमघाट के पास पहुंचे तो वहां पहले से घात लगाकर बैठे नक्सलियों ने हमला कर दिया। बहादुरी से लड़ते हुए अपने पांच अन्य साथियों के साथ वह भी वीरगति को प्राप्त हो गए। उन्हें भाई की शहादत पर गर्व है, लेकिन गांव और उनके परिजनों की उपेक्षा का दर्द भी है।

 

विज्ञापन

विकास के साथ ही मूर्ति लगाने की मांग
शहीद के नाम पर विधायक श्यामधनी राही ने गांव के बाहर सड़क द्वार का निर्माण कराया है। शहीद के भाई अनिल मणि त्रिपाठी का कहना है कि जिले के इकलौते शहीद का गांव आज भी उपेक्षित है। भाई की शहादत से गांव और परिवार को गर्व भी है लेकिन गांव में शहीद भाई की याद में एक मूर्ति लगाने और गांव के विकास की मांग आज भी वह कर रहे हैं।

विकास का मिला था आश्वासन
तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की सरकार में कृषि मंत्री दिवाकर विक्रम सिंह ने शहीद के गांव को गोद लेकर यहां के संपूर्ण विकास की बात की थी। शहीद वीरेंद्र मणि के मूर्ति लगाने की भी बात थी, लेकिन गांव में मंडी समिति की तरफ से सिर्फ एक मार्ग पर खड़ंजा एवं नाली के निर्माण के बाद यह योजना भी फाइलों में बंद हो गई। ग्रामीणों ने इस गांव में केंद्र व प्रदेश सरकार के अलावा जनप्रतिनिधियों से विकास के कार्य कराने की मांग की।

बेटी भी सीआरपीएफ में शामिल
देश की सेवा से ओतप्रोत इस परिवार का जज्बा शहादत के बाद भी कम नहीं हुआ। परिवार ने शहीद वीरेंद्र की छोटी बेटी रीता को 2014 में सीआरपीएफ में भर्ती हुई। वर्तमान में दिल्ली में अपनी सेवाएं दे रही है। कभी देश के लिए खुद सेवा कर चुके बुजुर्ग हंस नाथ त्रिपाठी कहते हैं कि बेटे की शहादत की खबर सुनकर पूरा परिवार स्तब्ध रह गया था लेकिन फिर हिम्मत और साहस से इस परिस्थिति का सामना कर पोती को भी देश की सेवा के लिए भेज दिया।


 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें