विकास के साथ ही मूर्ति लगाने की मांग
शहीद के नाम पर विधायक श्यामधनी राही ने गांव के बाहर सड़क द्वार का निर्माण कराया है। शहीद के भाई अनिल मणि त्रिपाठी का कहना है कि जिले के इकलौते शहीद का गांव आज भी उपेक्षित है। भाई की शहादत से गांव और परिवार को गर्व भी है लेकिन गांव में शहीद भाई की याद में एक मूर्ति लगाने और गांव के विकास की मांग आज भी वह कर रहे हैं।
विकास का मिला था आश्वासन
तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की सरकार में कृषि मंत्री दिवाकर विक्रम सिंह ने शहीद के गांव को गोद लेकर यहां के संपूर्ण विकास की बात की थी। शहीद वीरेंद्र मणि के मूर्ति लगाने की भी बात थी, लेकिन गांव में मंडी समिति की तरफ से सिर्फ एक मार्ग पर खड़ंजा एवं नाली के निर्माण के बाद यह योजना भी फाइलों में बंद हो गई। ग्रामीणों ने इस गांव में केंद्र व प्रदेश सरकार के अलावा जनप्रतिनिधियों से विकास के कार्य कराने की मांग की।
बेटी भी सीआरपीएफ में शामिल
देश की सेवा से ओतप्रोत इस परिवार का जज्बा शहादत के बाद भी कम नहीं हुआ। परिवार ने शहीद वीरेंद्र की छोटी बेटी रीता को 2014 में सीआरपीएफ में भर्ती हुई। वर्तमान में दिल्ली में अपनी सेवाएं दे रही है। कभी देश के लिए खुद सेवा कर चुके बुजुर्ग हंस नाथ त्रिपाठी कहते हैं कि बेटे की शहादत की खबर सुनकर पूरा परिवार स्तब्ध रह गया था लेकिन फिर हिम्मत और साहस से इस परिस्थिति का सामना कर पोती को भी देश की सेवा के लिए भेज दिया।