सिद्धार्थनगर। खेसरहा ब्लॉक के ग्रामीण क्षेत्रों में रात की बिजली कटौती ने हजारों उपभोक्ताओं की परेशानी बढ़ा दी है। विभागीय रोस्टरिंग और बार-बार होने वाले फाॅल्ट से जहां अंधेरे में रात बीत रही है। वहीं, गर्मी से नींद भी पूरी नहीं हो पा रही है।
इससे बच्चों की पढ़ाई, घरेलू कार्य और दैनिक जीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। ग्रामीणों ने निगम के अधिकारियों से रात्रिकालीन आपूर्ति सुनिश्चित कराने की मांग की है। बांसी उपकेंद्र से संबद्ध मरवटिया (महुलानी) के माध्यम से क्षेत्र के एक सौ से अधिक गांवों में बिजली आपूर्ति की जाती है। इस उपकेंद्र से लगभग 15 हजार उपभोक्ता जुड़े हुए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि शाम करीब साढ़े सात बजे से रात एक बजे तक दो चरणों में रोस्टरिंग के नाम पर लगभग पांच घंटे बिजली आपूर्ति बाधित रहती है।
यही समय है जब ग्रामीण भोजन बनाते हैं, बच्चे पढ़ाई और गृहकार्य करते हैं। ऐसे समय में गर्मी में राहत के लिए बिजली पर निर्भरता बढ़ जाती है। ग्रामीणों का कहना है कि लगातार हो रही कटौती से विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। साथ ही बुजुर्गों, महिलाओं और छोटे बच्चों को भी भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। लोगों ने मांग की कि रात्रि के समय अनावश्यक रोस्टरिंग पर रोक लगाकर नियमित बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की है।
भारतीय किसान यूनियन के पूर्व जिलाध्यक्ष प्रदीप पांडेय ने कहा कि शासन की व्यवस्था के अनुसार शाम छह बजे से सुबह छह बजे तक ग्रामीण क्षेत्रों में निर्बाध बिजली आपूर्ति का प्रावधान है लेकिन विभागीय मनमानी से रात में अंधाधुंध कटौती की जा रही है। इससे आम जनता को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है।
क्षेत्रीय रामानुज ने बताया कि रात में बार-बार बिजली जाने से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। अंधेरे और उमस के कारण परिवारों को रात जागकर बितानी पड़ रही है।
इस संबंध में अधिशाषी अभियंता एसपी गौतम ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में निर्धारित रोस्टर के अनुसार प्रतिदिन 18 घंटे बिजली आपूर्ति की जा रही है। यदि किसी क्षेत्र में निर्धारित समय से अधिक कटौती या तकनीकी समस्या हो रही है तो इसकी जांच कर आवश्यक कार्रवाई करते हुए समस्या का शीघ्र समाधान कराया जाएगा।
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