संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। नेपाल समेत जिले में पिछले पांच दिनों से रुक-रुककर हो रही बारिश से राप्ती, बूढ़ी राप्ती समेत अन्य नदियों का जलस्तर लगातार घट-बढ़ रहा है। डुमरियागंज कस्बे के निकट राप्ती नदी के किनारे तेज कटान से 33 हजार वोल्ट के बिजली टॉवर के नदी में समाने का खतरा मंडराने लगा है। टावर कटान स्थल से महज कुछ दूरी पर स्थित है।
उधर, अन्य नदियों के किनारे भी कटान का खतरा बढ़ने से तटवर्ती गांवों के लोगों की चिंता बढ़ गई है। सिंचाई विभाग भी संवेदनशील स्थलों पर लगातार निगरानी कर रहा है।
शनिवार तक घट रहा नदियों का जलस्तर रविवार को लगातार बारिश के कारण फिर बढ़ने लगा। हालांकि सभी नदियां अभी खतरे के निशान से काफी नीचे बह रही हैं लेकिन जलस्तर में उतार-चढ़ाव के चलते तटों पर कटान तेज हो गया है। राप्ती, बूढ़ी राप्ती, कूड़ा, घोंघी समेत अन्य नदियों के किनारे स्थित 39 से अधिक अति संवेदनशील और संवेदनशील स्थलों पर कटान का खतरा बना हुआ है।
शाहपुर प्रतिनिधि के अनुसार, डुमरियागंज कस्बे के बैदौलागढ़ के पास राप्ती नदी का कटान तेज हो गया है। यहां कटान की जद में बांसी से सिरसिया जाने वाली बिजली लाइन का टॉवर भी आ गया है। कई किसानों के खेत नदी में समा चुके हैं और बैदौला-भड़रिया बांध पर भी खतरा मंडरा रहा है।
बीते वर्षों में कटान से नदी किनारे स्थित कई गांवों के मकान, बाग और खेत नदी में समा चुके हैं। वर्ष 2024 में भनवापुर ब्लॉक क्षेत्र के बेतनार मुस्तहकम गांव के पास राप्ती नदी के कटान से प्रभावित बिजली टॉवर को हटाना पड़ा था। वहीं, बिजौरा स्थित गोशाला पर भी कटान का खतरा बना हुआ है। पूर्व में गोशाला के एक ओर स्थित सीमेंट शेड का करीब पांच फीट हिस्सा नदी में समा चुका है।
यहां कटान से हो चुका है भारी नुकसान : बूढ़ी राप्ती नदी के कटान से जोगिया और उसका ब्लॉक क्षेत्र के कई गांवों के मकान, बाग और खेत नदी में विलीन हो चुके हैं। उसका ब्लॉक के हथिवड़ताल गांव के टोला तिवारीडीह में 17 से अधिक मकान नदी में समा चुके हैं।
ग्राम छितरापार में भी पिछले वर्षों में 40 से अधिक मकान कटान की भेंट चढ़ चुके हैं। इसी तरह जोगिया ब्लॉक के फत्तेपुर और खजुरडाड़ गांवों में भी कई मकान नदी में समा चुके हैं।
इन क्षेत्रों में हर वर्ष कटान का खतरा बना रहता है। हालांकि, सिंचाई विभाग की ओर से बचाव और मरम्मत कार्य कराए गए हैं लेकिन ग्रामीण सहमे हैं।