सिद्धार्थनगर। नेपाल में नकली नोट छापने के पर्दाफाश और इसमें भारतीयों के पकड़े जाने के बाद नेपाल की सुरक्षा एजेंसियां पूरा नेटवर्क खंगालने में जुटी हैं। तीन माह में तीन मामले सामने आने बाद ऑपरेशन चार्ली के तहत जांच की जा रही है।
पूर्व में पाकिस्तान से नकली नोट बांग्लादेश के रास्ते मालदा और सिलीगुड़ी के जरिये भेजे जाने का खुलासा हो चुका है, ऐसे में नेपाल के पुलिस अफसरों को नेटवर्क के तार बांग्लादेश और पाकिस्तान से भी जुड़े होने का संदेह है।
नेपाल के सीमावर्ती जनपदों में नकली नेपाली करेंसी की खेप लगातार पकड़ी जा रही है। नेपाल पुलिस की ऑपरेशन चार्ली के तहत की गई कार्रवाई में छपाई मशीन, स्याही के साथ नोट छापने की अन्य सामग्री भी बरामद हो चुकी। इसमें नेपाली नागरिकों के साथ भारतीय भी पकड़े गए हैं। तीन महीने में तीन मामलों के पर्दाफाश के बाद इस नेटवर्क का भारतीय कनेक्शन भी खंगाला जा रहा है।
पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि कहीं यह नेटवर्क भारत के रास्ते नेपाल में सक्रिय किसी बड़े गिरोह से तो नहीं जुड़ा है। नेपाल पुलिस और खुफिया एजेंसियां आरोपी के मोबाइल, संपर्क सूत्रों और आर्थिक लेन-देन की भी जांच कर रही हैं।
यूपी के सिद्धार्थनगर, महाराजगंज, बहराइच, बलरामपुर, श्रावस्ती और पीलीभीत जिले के कुछ हिस्से नेपाल बॉर्डर से जुड़े हुए हैं। पूर्व में पश्चिम बंगाल के रास्ते पाकिस्तान से भेजे गए नकली नोट पकड़े जाने के साथ ही देश के कई हिस्सों में पाकिस्तानी नेटवर्क की बात भी सामने आ चुकी है।
वर्तमान मामलों में किसी अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की आधिकारिक पुष्टि फिलहाल नहीं हो सकी है लेकिन पूर्व के मामलों के मद्देनजर नेपाल की जांच एजेंसियां पाकिस्तान और बांग्लादेश से भी इस सिडिंकेट के तार जुड़े होने की आशंका जता रही हैं।
सिलीगुड़ी-मालदा कॉरिडोर रहा है संवेदनशील : सीमा सुरक्षा से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि शुरुआती जांच में किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।
हालांकि, पश्चिम बंगाल का सिलीगुड़ी और मालदा इलाका लंबे समय से तस्करी और नकली करेंसी के लिए संवेदनशील माना जाता रहा है। ऐसे में नेपाल की जांच एजेंसियां भी उसी एंगल को ध्यान में रखकर नेटवर्क की परतें खंगाल रही हैं। संवाद े