शाहपुर। राप्ती नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने से डुमरियागंज तहसील क्षेत्र के किसानों की चिंता बढ़ गई है। हालांकि नदी अभी खतरे के निशान से काफी नीचे बह रही है लेकिन पिछले वर्षों के अनुभवों को देखते हुए राप्ती के किनारे बसे 30 से अधिक गांवों के किसानों को बाढ़ का डर सताने लगा है। धान की रोपाई पूरी कर चुके किसानों को आशंका है कि यदि नदी का जलस्तर इसी तरह बढ़ता रहा तो उनकी मेहनत और लाखों रुपये की लागत पर पानी न फिर जाए।
सोमवार से लगातार बढ़ रहे राप्ती नदी के जलस्तर पर ग्रामीणों की नजर बनी हुई है। क्षेत्र के रमवापुर उर्फ नेबुआ, पेंडारी मुस्तहकम समेत नदी से सटे कई गांवों में अधिकांश किसान धान की रोपाई पूरी कर चुके हैं। ऐसे में संभावित बाढ़ की आशंका ने उनकी चिंता बढ़ा दी है।
ग्रामीणों का कहना है कि फिलहाल नदी खतरे के निशान से नीचे बह रही है लेकिन यदि नेपाल के तराई क्षेत्रों में लगातार बारिश जारी रही तो जलस्तर तेजी से बढ़ सकता है। ऐसे में प्रशासन को अभी से सतर्क रहकर स्थिति पर नजर रखनी चाहिए ताकि जरूरत पड़ने पर समय रहते राहत एवं बचाव की व्यवस्था की जा सके।
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बोले किसान
- रमवापुर उर्फ नेबुआ निवासी किसान रामजीत वर्मा ने बताया कि उन्होंने 11 बीघा खेत में धान की रोपाई कराई है, जिस पर करीब 50 से 55 हजार रुपये खर्च हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि दो दिनों से राप्ती का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। यदि बाढ़ आ गई तो पूरी फसल बर्बाद हो जाएगी और भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।
- पेंडारी मुस्तहकम निवासी किसान पप्पू चौधरी ने बताया कि गांव के अधिकांश किसानों ने धान की रोपाई पूरी कर ली है। वर्ष 2024 में भी रोपाई के बाद आई बाढ़ से किसानों को भारी नुकसान हुआ था। राप्ती नदी के किनारे बसे होने के कारण हर वर्ष बाढ़ का खतरा बना रहता है।