संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। 30 वर्षों से उपेक्षा का दंश झेल रही जिले की 124 साधन सहकारी समितियों के दिन अब बहुरने लगे हैं।
न्याय पंचायत स्तर पर संचालित इन समितियों के जर्जर हो चुके भवनों का पुनर्निर्माण, मरम्मत व जीर्णोद्धार हो रहा है। इनमें 90 सहकारी समितियों पर खाद बीज वितरण के साथ ही उन्हें सीएससी के तौर पर एक्टिव किया गया है। वहीं इन समितियों पर बैंक शाखा की तरह ऋण वितरण एवं एटीएम की सुविधा उपलब्ध कराने की प्रक्रिया भी चल रही है।
जिले की प्रत्येक न्याय पंचायत में चल रही साधन सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों को खाद, बीज का वितरण होता रहा है। इनमें अधिकतर समितियों का भवन 50 वर्ष पूर्व निर्मित हुआ था, जिनका रखरखाव और मरम्मत न होने से वह जर्जर हो चुकी हैं। जिले की 124 समितियों में 30 समिति के भवन की स्थिति अच्छी थी, शेष में 31 समितियां के भवन मरम्मत योग्य थे। इनमें 25 समितियों का संबंधित ब्लॉक क्षेत्र की क्षेत्र पंचायत निधि से तीन से सात लाख रुपये खर्च करके मरम्मत कराई जा चुकी है।
इसके तहत क्षतिग्रस्त हो चुकी समितियों की छत, दीवार, फर्श, दरवाजे व खिड़की की मरम्मत की गई, जिससे जिले की 61 समितियों की स्थिति में सुदृढ़ हो चुकी है। वहीं जर्जर व ध्वस्तीकरण के कगार पर पहुंच चुकी शेष समितियों में 14 समितियों के नए भवन के निर्माण के लिए 56-56 लाख रुपये स्वीकृत हो चुके हैं। इनमें 11 समितियां नीति आयोग मद से, एक समिति आकांक्षी ब्लॉक के तहत और एक समिति भवन नगर पंचायत डुमरियागंज द्वारा निर्मित कराई जा रही है।
शेष समितियों के भवन निर्माण के लिए सहकारिता विभाग में प्रस्ताव भेजा गया है।
90 समितियों पर मिलेगी सीएससी समेत अन्य सुविधाएं: वर्तमान में जिले की 124 सहकारी समितियों में 90 समितियों पर सीएससी संचालन के लिए समिति के सचिवों को प्रशिक्षित किया गया है। इसके साथ ही समितियों को कंप्यूटराइज्ड किया जा रहा है, और ऑनलाइन मीटिंग के लिए टीवी स्क्रीन भी उपलब्ध कराई गई है। समिति पर सीएससी के संचालन से किसानों समेत ग्रामीणों को खतौनी, आय, जाति व निवास प्रमाणपत्रों के साथ राजस्व समेत अन्य अभिलेखों की उपलब्धता में सुविधा होगी। समितियों पर माइक्रो एटीएम लगाने की कार्ययोजना तैयार की गई है। जहां से किसान किसी भी बैंक के एटीएम से धनराशि की निकासी कर सकेंगे। वहीं सीएससी के तौर संचालित हो रही बनियाडीह व पथरा समिति पर लोगों को बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने के साथ उनकी आय में भी वृद्धि हुई है।