फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

आंशिक परिसीमन के कारण पंचायतों का नए सिरे से होगा आरक्षण

विज्ञापन
विज्ञापन
आंशिक परिसीमन के कारण पंचायतों का नए सिरे से होगा आरक्षण
विज्ञापन

मार्च में होना है पंचायत चुनाव, आरक्षण नहीं होने से लोगों में ऊहापोह
नगर निकायों के सृजन एवं सीमा विस्तार से घट गया है पंचायतों का दायरा
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। नगर निकायों के सृजन एवं सीमा विस्तार के बाद आंशिक परिसीमन होने से जिले में पंचायतों के आरक्षण का चक्र नए सिरे से शुरू होगा। परिसीमन में जिला पंचायत एवं क्षेत्र पंचायत के वार्डों और ग्राम पंचायतों की तादाद घट गई। इससे आरक्षण प्रक्रिया का चक्र भी बदल जाना तय है। शासन की तरफ से मार्च 2021 के अंतिम सप्ताह तक पंचायत चुनाव करा लिए जाने के लिए तैयारियां तेज कर दी गई हैं। जबकि अभी तक पंचायतों के आरक्षण के संबंध में कोई प्रक्रिया शुरू नहीं की गई है, जिससे दावेदारों में ऊहापोह की स्थिति है। इधर जिले में पांच नगर पंचायतों के सृजन और दो नगर निकायों के सीमा विस्तार के कारण जिला पंचायत एवं क्षेत्र पंचायत के वार्डों और ग्राम पंचायतों का भी आंशिक परिसीमन हुआ।
पंचायत चुनाव के जानकार सेवानिवृत्त एडीओ पंचायत आरबी सिंह बताते हैं कि आंशिक परिसीमन के कारण पहले से चल रहे पंचायतों के आरक्षण का चक्र प्रभावित होंगे, जिससे आरक्षण का चक्र नए सिरे शुरू होना तय है। ऐसे में कई जिला पंचायत, क्षेत्र पंचायत वार्डों और ग्राम पंचायत के आरक्षण की स्थिति में दोहराव हो सकता है। कई पंचायत क्षेत्र का उम्मीद के विपरीत आरक्षण हो सकता है।
विज्ञापन

शासन से आरक्षण संबंधी कोई निर्देश नहीं मिला है, जैसे ही आरक्षण प्रक्रिया संबंधी निर्देश मिलेगा, नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
- आदर्श, जिला पंचायतराज अधिकारी
घट गए जिला, क्षेत्र और ग्राम पंचायत का दायरा
जिले में पांच नगर पंचायत के सृजन एवं दो नगर निकायों के सीमा विस्तार के बाद हुए परिसीमन में 48 सदस्यीय जिला पंचायत के तीन वार्ड और सात क्षेत्र पंचायतों के 91 वार्डों का अस्तित्व समाप्त हो गया है। इससे जिले के 1199 ग्राम पंचायत में 63 ग्राम पंचायतों का अस्तित्व समाप्त होने के बाद 1136 ग्राम पंचायत ही शेष बचे हैं।
विज्ञापन

असमंजस में दावेदार, तैयारी दरकिनार
पंचायतों के आरक्षण की स्थिति स्पष्ट नहीं होने के कारण दावेदार असमंजस में है और इससे उनकी तैयारी पर भी असर पड़ रहा है। सर्वाधिक ऊहापोह में सामान्य वर्ग के दावेदार हैं क्योंकि उनको अनारक्षित वर्ग में ही मौका मिलेगा। जबकि अनुसूचित और पिछड़े वर्ग के दावेदार अनारक्षित वर्ग में भी दांव आजमा सकते हैं। कुछ दावेदार आरक्षण की स्थिति स्पष्ट होने तक इंतजार करते नजर आ रहे हैं, जिससे उन्होंने तैयारी भी ढीली कर दी है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें