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16 माह बाद शुरू हुई मुलाकात, फिर भी लौटे निराश

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संवाद न्यूज एजेंसी
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सिद्धार्थनगर। जिला कारागार में बंद बंदियों-कैदियों के परिजनों को 16 अगस्त से अपनों से मिलने की अनुमति शासन दी थी। स्थानीय जिला कारागार में बड़ी संख्या में लोग मिलने के लिए पहुंचे। इनमें से किसी के पास भी कोरोना संक्रमण से जुड़ी आरटीपीसीआर जांच की रिपोर्ट नहीं थी। ऐसे में जो लोग आए थे, उन्हें सामान भेजवाकर ही संतोष करना पड़ा।
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कोरोना की पहली लहर में जेलों में फैलते हुए संक्रमण को देखकर शासन ने बंदियों से मुलाकात पर पूर्ण रूप से रोक लगा दी थी। भीड़ कम हो इसलिए कैदियों को पैरोल पर कुछ दिनों के लिए छोड़ा गया। पहली लहर से कुछ निजात मिलती, इसी बीच दूसरी लहर आ गई। स्थिति नियंत्रण में हुई तो शासन ने 16 अगस्त से सोमवार से कोरोना गाइड लाइन का पालन करते हुए बंदियों से उनके परिजनों की मुलाकात कराने की छूट दी। पहले दिन कम ही लोग पहुंचे। इन लोगों के मन में अपनों से मिलने के लिए गजब का उत्साह था। मगर उनकी यह उम्मीद पूरी नहीं हुई। मुलाकात के लिए जो लोग भी आए थे उनके पास शासन की ओर से जारी दिशा-निर्देश के मुताबिक 72 घंटे के भीतर कोरोना जांच की आरटीपीसीआर की निगेटिव रिपोर्ट नहीं थी। जेल में बंद बेटे से मिलने पहुंचे बूढ़े पिता काउंटर तक गए तो उन्हें नियम की जानकारी दी गई। इसके बाद वे निराश हो गए। जिला अस्पताल पहुंचे और जांच कराई। नाम न छापने की बात करते हुए कहा कि एक ही बेटा है। जेल जाने के बाद से हम पति-पत्नी अकेले पड़ गए हैं। बंद होने के कुछ ही दिन बाद मुलाकात बंद हो गई। आज पहुंचे तो सोचा कि मुलाकात हो जाएगी। मगर हुई नहीं, कल फिर आएंगे। इसी प्रकार अन्य बंदियों से मिलने पहुंचे उनके परिजनों ने बताया। जेल अधीक्षक आरके पांडेय ने बताया कि आरटीपीसीआर जांच की रिपोर्ट न होने के कारण किसी बंदी से उनके परिजन की मुलाकात नहीं हो सकी। रिपोर्ट लेकर आने के लिए लोगों को बताया गया है।
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