शिया समुदाय के पहले इमाम हजरत अली अलैहिस्सलाम की यौमे पैदाइश (जयंती) गुरुवार को धूमधाम से मनाया गया। इस मौके पर शिया बाहुल्य कस्बा हल्लौर में लगातार दो दिनों तक महफिल मिलाद का सिलसिला चलता रहा। अकीदतमंदों ने मस्जिदों और घरों की सजावट और आतिशबाजी कर अपनी खुशी का इजहार किया।
हजरत अली के जन्म दिवस को लेकर कार्यक्रमों के आयोजन का सिलसिला बुधवार की रात से ही शुरू हो गया था जो गुरुवार को भी जारी रहा। इस मौके पर हल्लौर कर्बला पर हजरत अली के रौजे व जामा मस्जिद सहित सभी मस्जिदों व घरों पर विधिवत सजावट कर रोशनी की गई थी। सारी रात महफिल मिलाद होती रही।
बुधवार की रात जामा मस्जिद, तशबीब हसन व मोहम्मद हैदर के आवास पर महफिल का आयोजन हुआ। इसमें मशहूर शायर शमशाद हल्लौरी, खुर्शीद जफर, तंजीम हल्लौरी, हानी, कायनात, आरजू, कमर, सुरखुरू, नब्बू मीरा, अफसर हल्लौरी, अजीम हल्लौरी, खुलूस हल्लौरी, आलम हल्लौरी, मीसम, हसन जमाल, शकील हैदर, बब्लू सहित तमाम शायरों ने हजरत अली की शान में कलाम व कसीदा पेश किया।
गुरुवार को जुलूसे हैदरी जामा मस्जिद के प्रांगण से अली ब्वायज कमेटी व मोमनीन हल्लौर की जानिब से निकाला गया। जुलूस हल्लौर कस्बे में दुरूदो सलाम और नारे हैदरी की सदाओं के बीच सैकड़ों दो पहिया वाहनों के साथ बैदौला होते हुए डुमरियागंज डाक बंगला पहुंचा।
यहां सपा नेता रामकुमार चिनकू ने जुलूस का स्वागत किया। जुलूस में शामिल अकीदतमंदों में सबील व ठंडा पानी की बोतलें वितरित की गई। इस मौके पर प्रधान संघ के मंडल अध्यक्ष ताकीब रिजवी, पवन यादव, अनवर, पप्पू पांडेय, अवधेश सिंह, अबूजर आदि मौजूद रहे। जुलूस डुमरियागंज से वापस हल्लौर आकर खत्म हुआ। जहां अली डे का कार्यक्रम हुआ। इसमें में कलाम पाक की तिलावत अजीम मास्टर व नाते पाक शकील अहमद ने किया।