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Siddharthnagar News: युद्ध में जाने के लिए तैयार

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.चंद्र किशोर मिश्रा।
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-सिद्धार्थ विश्वविद्यालय के एनसीसी कैडेट्स ने पाकिस्तान से हो रहे युद्ध पर व्यक्त की प्रतिक्रिया
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संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। सिद्धार्थ विश्वविद्यालय के एनसीसी कैडेट्स ने ऑपरेशन सिंदूर के बाद बने हालात और देश की सीमाओं पर शत्रु की सक्रियता को देखकर सीमाओं की रक्षा के लिए अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की है। उत्साह दिखाते हुए कैडेट्स ने कहा कि यदि सरकार उन्हें युद्ध के लिए बुलावा देती है, तो वे बिना किसी हिचकिचाहट के देश की सीमा पर मोर्चा लेने के लिए तैयार हैं।
सिद्धार्थ विश्वविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर लेफ्टिनेंट डॉ. प्रज्ञेश नाथ त्रिपाठी ने कहा कि युद्ध के दौरान एनसीसी ऑफिसर और कैडेट्स की भूमिका ''सेकंड लाइन ऑफ डिफेंस'' के रूप में होती है। एनसीसी कैडेट्स को भारतीय सेना का समर्थन करने के लिए सहायक बल के रूप में तैनात किया जाता है। 1965 व 1971 के युद्ध में भी एनसीसी ऑफिसर व कैडेट्स की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। ऐसे में यदि सरकार कैडेट्स को बुलाती है तो वह पूरा सहयोग देंगे।
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उन्होंने कहा कि आतंक के विरुद्ध अंतरराष्ट्रीय सहयोग, भारत सरकार व सेना के सही निर्णय से हम अपने देश की रक्षा कर सकते हैं। इससे हम पूरे विश्व को सकारात्मक संदेश दे भी सकते हैं।

बोले कैडेट्स
मातृभूमि की रक्षा के लिए हर संभव बलिदान देने के लिए तत्पर हैं। एनसीसी ने टीम वर्क, नेतृत्व क्षमता और त्वरित निर्णय लेने जैसे महत्वपूर्ण कौशल सिखाए हैं, जो युद्ध की स्थिति में अत्यंत महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।
-चंद्रकिशोर मिश्र, कैडेट
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एनसीसी के प्रशिक्षण ने अनुशासन, साहस और कर्तव्यनिष्ठा सिखाया है, किसी भी चुनौतीपूर्ण परिस्थिति का सामना करने में सक्षम हैं। देश के जिम्मेदार नागरिक के साथ ही सैनिक भी हैं।
-तपस्या सिंह, कैडेट

कैडेट्स शारीरिक और मानसिक रूप से पूरी तरह से प्रशिक्षित हैं और देश की सुरक्षा के लिए किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए दृढ़ संकल्पित हैं। यह दृढ़ संकल्प और देशभक्ति का जज्बा युवाओं के लिए एक प्रेरणास्रोत है।
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-राधा शुक्ला, सीनियर कैडेट

देश की युवा पीढ़ी राष्ट्र की सुरक्षा और अखंडता के प्रति कितनी सजग और समर्पित है। देश को हमारी सेवाओं की आवश्यकता हो तो हमें अवसर दिया जाए। देश के लिए अपनी जान की बाजी लगाने में भी संकोच नहीं करेंगे।
-राज त्रिपाठी, सीनियर कैडेट
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