बाढ़ के पानी से कटा कठेला-तुलसियापुर मार्ग। संवाद
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सिद्धार्थनगर में राप्ती नदी 11 दिन बाद शनिवार को खतरे के निशान से नीचे आ गई। साथ ही जिले की अन्य नदियों का भी जलस्तर लगातार घट रहा है। प्रशासन की तरफ से घोषित जिले के बाढ़ प्रभावित 580 गांवों में 387 गांव मैरूंड होने से लोगों को काफी नुकसान झेलना पड़ा है। इनमें सर्वाधिक 85 मैरूंड गांव शोहरतगढ़ तहसील क्षेत्र के हैं।
जिले में 11 दिन तक बाढ़ का तांडव मचा रही नदियों का जलस्तर शनिवार को कम हो गया। राप्ती नदी खतरे के निशान 84.900 मीटर से नीचे 84.630 मीटर पर आ गई। वहीं बूढ़ी राप्ती भी शनिवार शाम को लाल निशान 85.650 मीटर से नीचे 85.590 मीटर पर पहुंच गई। जबकि कूड़ा, बानगंगा, घोघी, तेलार और जमुआर नदियां पहले ही खतरेे के निशान से नीचे आ चुकी हैं। बाढ़ से प्रभावित नौगढ़ तहसील के 93 गांवों में 68 गांव मैरूंड रहे। बांसी के बाढ़ प्रभावित 155 गांवों में 82 गांव मैरूंड रहे।
डुमरियागंज के 144 बाढ़ प्रभावित गांवों में 90 गांव मैरूंड, इटवा के 103 बाढ़ प्रभावित गांवों में 62 गांव मैरूंड और शोहरतगढ़ के सभी 85 बाढ़ प्रभावित गांवों को मैरूंड घोषित किया गया है। इन गांवों की 4.50 लाख की आबादी और 58,857 हेक्टेयर क्षेत्रफल बाढ़ प्रभावित रहा। इस क्षेत्र में जलमग्न होने से फसल सड़कर नष्ट हो चुकी है।
अब तक 19 मौतें
बाढ़ से जिले में अब तक 19 मौतें हो चुकी हैं। इनमें नौगढ़ तहसील में छह, बांसी में पांच, डुमरियागंज में पांच, इटवा में तीन मौतें शामिल हैं। प्रशासन की तरफ से अभी तक पशुओं की मौतों का आंकड़ा नहीं बताया गया है।