आपदा पर प्रहरी एप से अस्थायी रैन बसेरों की होगी जियो टैगिंग
राहत आयुक्त तक हर रोज पहुंचेगी रैन बसेरे में रहने वालों की जानकारी
नगर निकायों में हो रहे भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए सरकार ने उठाया कदम
संवाद न्यूज एजेंसी
डुमरियागंज। अस्थायी रैन बसेरे के नाम पर नगर निकाय अब सरकारी धन का गोलमाल नहीं कर पाएगी। ठंड से निजात के लिए जितने बेसहारा लोगों को आश्रय मिलेगा उतने का ही खर्च नगर निकायों को भुगतान किया जाएगा। रैन बसेरे के खर्च के आंकड़ों में हेराफेरी करने वाले नगर निकायों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। कार्रवाई का अधिकार और जिम्मेदारी राहत आयुक्त को सौंपी गई है।
बेसहारा लोगों को ठंड से बचाने के लिए नगर निकाय हर साल अपने यहां अस्थायी रैन बसेरे संचालित करते हैं। ठहरने वालों की संख्या हकीकत से अधिक दर्शा कर भारी भरकम बिल भुगतान करा दिया जाता है। रैन बसेरा के नाम पर हो रहे गोलमाल को रोकने के लिए इस साल शासन ने नया तरीका अपनाया है। अब सभी अस्थायी रैन बसेरों को आपदा प्रारूप के माध्यम से जियो टैग कराया जाएगा। नगर निकाय कर्मचारी हर दिन की फोटो अपलोड करेंगे। रैन बसेरे के इंतजाम पर राहत आयुक्त कार्यालय उत्तर प्रदेश की नजर रहेगी। पोर्टल पर मौजूद लोकेशन के आधार पर राहत आयुक्त कार्यालय की टीम नगर निकाय को जानकारी दिए बगैर रैन बसेरे का औचक निरीक्षण कर हकीकत परखेगी। किसी प्रकार की गड़बड़ी करने पर जिम्मेदारों का बच पाना मुश्किल होगा। डुमरियागंज नगर पंचायत के ईओ शिवकुमार ने बताया कि भारतभारी और बढ़नी चाफा नगर पंचायत के भी वह प्रभारी हैं। तीनों जगहों पर अस्थायी रैन बसेरे बनवाए गए हैं। जहां बेसहारा लोगों के ठहरने के साथ ही कोरोना से बचाव के नियमों का पालन कराया जाएगा। इस साल शासन द्वारा आपदा प्रहरी एप से सभी अस्थायी रैन बसेरों की जियो टैगिंग करने का निर्देश दिया गया है।
तहसील की तीन नगर पंचायतों में हैं तीन अस्थायी रैन बसेरे
डुमरियागंज, भारतभारी और बढ़नी चाफा में बेसहारा घूम रहे लोगों को ठंड से निजात के लिए नगर पंचायत में इस साल तीन जगह अस्थायी रैन बसेरा बनाया है। तीनों नगर पंचायतों के सभागार में अस्थायी रैन बसेरा बनाए गए हैं। इनमें 10-10 लोगों के ठहरने के लिए रजाई और गद्दे का इंतजाम किया गया है। नगर पंचायत खुद ही ठहरने वाले लोगों के लिए पानी की उपलब्धता, अलाव की व्यवस्था के साथ ही कोरोना से बचाव के लिए नियमों का पालन कराएंगे।