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अमर सिंह के सपा में शामिल होने के बाद उलझी सियासत

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अमर सिंह के सपा में शामिल होने के बाद उलझी सियासत
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सिद्धार्थनगर। टिकटों के लिए जिले के सभी पांच विधानसभा क्षेत्रों में घमासान जारी है। सभी प्रमुख दलों से टिकट की चाह रखने वाले नेताओं में अपनी दावेदारी पक्की करने के लिए होड़ मची है। नामों की घोषणा में हो रही देरी के बीच सबसे ज्याद राजनीतिक समीकरण शोहरतगढ़ विधानसभा में उलझे हुए हैं। पिछली बार भाजपा गठबंधन के सहयोगी दल के खाते में यह सीट गई थी और अपना दल एस के प्रत्याशी चौधरी अमर सिंह ने जीत हासिल की थी। चुनाव से ऐन पहले अमर सिंह ने सपा की सदस्यता लेकर यहां का सियासी पारा बढ़ा दिया है। प्रत्याशियों के नामों पर नेताओं से लेकर चुनाव में रुचि रखने वाले मतदाताओं तक में उलझन है। कौन नेता किस दल से टिकट पाएगा, इस पर असमंजस अब भी बना हुआ है।
शोहरतगढ़ विधानसभा क्षेत्र में प्रत्याशियों का ऐलान न होने से सबकी बेचैनी बढ़ी हुई है। किसी भी प्रमुख दल ने अभी अपने आधिकारिक उम्मीदवार की घोषणा नहीं की है। भाजपा का सहयोगी दल होने के बाद भी अमर सिंह शुरू से ही बगावती तेवर में रहे और कई मौकों पर भाजपा सरकार के खिलाफ खुलकर बोलने से परहेज नहीं किया। उनके दलबदल के बाद शोहरतगढ़ का सियासी गणित और भी उलझ गया। सपा से टिकट की दौड़ में शामिल अन्य नेताओं में बेचैनी बढ़ गई।
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जानकारों की मानें तो मौजूदा विधायक बिना किसी ठोस आश्वासन के दूसरे दल में आमतौर पर नहीं जाता है। हालांकि सपा से पिछला चुनाव लड़ चुके उग्रसेन सिंह, पूर्व विधायक अनिल सिंह के अलावा जमील सिद्दीकी भी पूरी शिद्दत से मैदान में हैं और क्षेत्र में मतदाताओं के बीच जाकर सपा में अपनी दावेदारी मजबूत होने का संदेश दे रहे हैं। वहीं पिछले चुनाव में समझौते में अपना दल को शोहरतगढ़ सीट देंने वाली भाजपा अब नए चुनावी समीकरण को सेट करने में लगी है। टिकट की रेस में भाजपा जिलाध्यक्ष गोविंद माधव, सिद्धार्थ चौधरी के अलावा पूर्व जिलाध्यक्ष लालजी त्रिपाठी का नाम सामने आ रहा है। वहीं पिछले चुनाव की तरह इस बार भी अपना दल के खाते में इस सीट के आने की संभावना को देखते हुए इस दल के नेता भी अपनी दावेदारी बनाए हुए हैं।
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अपना दल एस युवा मंच के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष हेमंत चौधरी का नाम भी चर्चा में बना हुआ है। बसपा की बात करें तो उसने राधा रमण त्रिपाठी को अपना प्रत्याशी घोषित किया है। कांग्रेस से एक पूर्व विधायक समेत चार लोग टिकट की उम्मीद लगाए बैठे हैं और क्षेत्र में पूरी तरह से सक्रिय हैं। फिलहाल शोहरतगढ़ विधानसभा क्षेत्र का सियासी समीकरण पूरी तरह से उलक्षा हुआ नजर आ रहा है। प्रत्याशियों के नामों की घोषणा में हो रही देरी ने सबकी बैचैनी बढ़ा रखी है। खासकर सत्ता पक्ष भाजपा और सपा के लिए इस सीट पर अपने चुनावी पत्ते खोलना टेढ़ी खीर साबित हो रहा है।
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