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गला काटने के तरीके  पर उलझी पुलिस

Sun, 22 May 2016 11:50 PM IST
siddharthnagar
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टक्कर इतनी जोरदार थी कि मोटर व्हीकल इंस्पेक्टर समीर दत्ता सड़क से करीब 25 फुट नीचे जा गिरे।
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उसका बाजार। सुबह 5 बजे हत्या हुई। साढ़े 5 बजे तक पूरा गांव पहुंच गया। इस आधे घंटे में ही हत्यारे घटनास्थल से एक किमी दूर जाते हैं। खेत में गड्ढा खोदते हैं और फिर कटे हुए सिर को दफनाकर इत्मीनान से फरार हो जाते हैं। न तो किसी को भनक लगती है और न ही कोई हत्यारों को देख पाता है। मदनपुर गांव के प्रधानपति लालमोहर के हत्या की यही कहानी अब तक बताई जा रही है। हालांकि महज आधे घंटे में ही सिर काटकर हत्या और कटे हुए सिर को दफनाकर गांव से सुरक्षित निकल जाने की बात किसी के गले से नीचे नहीं उतर रहा। वह भी तब, जब घटनास्थल ऐसा है, जहां भोर में 4 बजे से ही लोगों की आवाजाही शुरू हो जाती है।
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घटना से जुड़ा एक अन्य पहलू भी पुलिस के लिए उलझन बना हुआ है। हत्यारों ने जिस तरह से लालमोहर की गर्दन काटी, वह किसी सामान्य अपराधी के बस की बात नहीं मानी जा रही। गांव के लोग भी इसे स्वीकारते हैं कि हत्या में नामजद लोगों के पास इतनी हिम्मत तो नहीं थी कि अकेले कई पर भारी पडने वाले लालमोहर की गर्दन को काट सकें। घटना की प्रकृति बार-बार किसी पेशेवर व्यक्ति के भी हत्या में शामिल होने की ओर इशारा कर रही है। मगर यह पांचवां व्यक्ति कौन रहा होगा, इस पर सब मौन हैं। खुद पुलिस भी इन सवालों में उलझ कर रह गई है। जांच में लगे अफसरों को यह नहीं समझ आ रहा कि आखिर आधे घंटे में ही इतनी बारिकी से किसी की गर्दन काटकर, दफनाकर अपराधी पूरे गांव की नजर से बचते हुए फरार कैसे हो सकते हैं। फिलहाल इस मामले में पुलिस विभाग के अफसर भी बोलने से बच रहे हैं। उनका कहना है कि महत्वपूर्ण सुराग लगे हैं। जल्द हत्यारे गिरफ्त में होंगे। 

इंसान ही नहीं, सदमे में हैं बेजुबान भी
मदनपुर के प्रधानपति लालमोहर की हत्या को 60 घंटे से अधिक का समय बीत चुका है, मगर सदमे से लोग अब तक उबर नहीं पाए हैं। पूरे गांव में सन्नाटा छाया हुआ है। ग्रामीणों के बीच लालमोहर की छवि प्रभावी व्यक्ति के रूप में रही है। हर दुख-सुख में स्वत: पहुंचने वाले लालमोहर की मौत से इंसान ही नहीं बेजुबान भी सदमे में हैं। लालमोहर के दो पालतू तोते शुक्रवार की सुबह से ही मौन है। सुबह उठने के बाद लालमोहर सबसे पहले इन तोतों से बात करते थे। अपनी आवाज से हमेशा घर को गुलजार किए रहने वाले तोतों की आवाज लालमोहर की हत्या के बाद से नहीं सुनी गई। पिजड़े में गुमशुम और उदास बैठे यह बेजुबान परिवार के अन्य सदस्यों की तरह ही मर्माहत नजर आ रहे हैं।
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जमानत पर थे आरोपी, फिर जा सकते हैं जेल
प्रधानपति लालमोहर के हत्यारों की गिरफ्तारी के लिए उसका थाना में पूर्व में तैनात रहे दरोगाओं को लगाया गया है। विवाद को लेकर पूर्व में हुई घटनाओं की कड़ी जोड़ते हुए वह आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश में लगे हुए हैं। पुलिस की अब तक की छानबीन में यह सामने आया है कि हत्या में नामजद किए गए आरोपी जमानत पर बाहर थे। ऐसे में आशंका जताई जा रही है पुलिस की गिरफ्त से बचते हुए खुद को सुरक्षित करने के लिए जमानत तोड़वा कर जेल जा सकते हैं। इस पहलू को ध्यान में रखते हुए पुलिस उनके पैरोकारों से भी संपर्क बनाए हुए है, ताकि कोर्ट पहुंचने से पहले उन्हें दबोचा जा सके।

घटना के हर पहलू को बारिकी से खंगाला जा रहा है। हत्या में कोई पेशेवर भी हो सकता है, मगर यह हत्यारों की गिरफ्तारी के बाद ही स्पष्ट होगा। घटना के संबन्ध में कुछ महत्वपूर्ण सुराग लगे हैं। उसके आधार पर ही हत्यारों की गिरफ्तारी के पुलिस की अलग-अलग टीमें जिले से रवाना की गई है। उम्मीद है, जल्द ही बड़ी सफलता मिलेगी। -लल्लन सिंह, एसपी।
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